राज्यपाल कल्याण सिंह को मोदी की प्रशंसा करना पड़ा महंगा, Election Commission राष्ट्रपति को लिख सकता है पत्र

संक्षेप:

  • राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा था- हम सभी हैं बीजेपी के कार्यकर्ता
  • राज्यपाल कल्याण सिंह ने अलीगढ़ में पीएम नरेंद्र मोदी के समर्थन में एक राजनीतिक बयान दिया था
  • चुनाव आयोग राष्ट्रपति को या फिर सीधे राज्यपाल कल्याण सिंह को पत्र लिख सकता है

लखनऊ: राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह(Governor Kalyan Singh) पर इलेक्शन कमीशन(Election Commission Of India) कोई कड़ी कार्रवाई कर सकता है. जानकार बता रहे हैं कि इलेक्शन कमीशन इस मसले पर राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कार्रवाई के लिए आग्रह कर सकता है. दरअसल राज्यपाल कल्याण सिंह (Governor Kalyan Singh) ने पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में पीएम नरेंद्र मोदी के समर्थन में एक राजनीतिक बयान दिया था. चुनाव आयोग राज्यपाल कल्याण सिंह (Governor Kalyan Singh) के इस बयान को आचार संहिता का उल्लंघन मानता है.

राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा था- हम सभी हैं बीजेपी के कार्यकर्ता

सूत्रों की मानें तो चुनाव आयोग (Election Commission Of India) आज की बैठक में राज्यपाल कल्याण सिंह (Governor Kalyan Singh) पर फैसला लेगा. आज की बैठक के बाद आयोग राष्ट्रपति को या फिर सीधे राज्यपाल कल्याण सिंह को पत्र लिख सकता है. गौरतलब है कि अलीगढ़ में 25 मार्च को राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह (Governor Kalyan Singh) ने सभी देशवासियों को बीजेपी कार्यकर्ता बताया था. उन्होंने कहा था कि `हम सभी बीजेपी कार्यकर्ता हैं, हम चाहते हैं कि बीजेपी ही चुनाव जीते. हम चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनें ये देश के लिए बहुत जरूरी है.

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1991 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे कल्याण सिंह

कल्याण सिंह 24 जून 1991 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उन्होंने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 6 दिसंबर 1992 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. वह 1993 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अतरौली और कासगंज से विधायक निर्वाचित हुए. कल्याण सिंह 21 सितंबर 1997 से 12 नवंबर 1999 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. 1999 में कल्याण सिंह ने सपा गठबंधन से नाता तोड़ लिया और जनवरी 2004 में बीजेपी से जुड़े. 2004 के आम चुनावों में उन्होंने बुलंदशहर से बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा. 2009 में उन्होंने एक बार फिर से बीजेपी छोड़ दी और एटा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय सांसद चुने गए.

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