लखनऊ : जानिए हवा कैसे खत्म कर रही नाना-नानी के घर जाने की आदत

संक्षेप:

  • लखनऊ में बच्चों को ननिहाल भेजने से कतराते हैं लोग
  • NYOOOZ की लखनऊ शहर पर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
  • जानिए क्यों बच्चों के लिए ख़तरनाक है लखनऊ

By: वात्सल्य शर्मा

नानी-नानी किसे पसंद नहीं। मजा बढ़ जाता है, जब वो अपने शहर में हों। लेकिन लखनऊ में यह खुशी नागवार गुजर रही है। गोमती नगर में रहने वाली प्रीति गौड़ का बेटा ईशू महज 12 किलोमीटर दूर लालबाग में नाना-नानी के घर कम जाने लगा है। दोनों परिवारों में सब ठीक है। रिश्‍ते भी नहीं बिगड़े। अगर कुछ खराब हुआ, तो इस शहर की आबोहवा है।

बकौल प्रीति, ‘ईशू जब भी नाना-नानी के घर जाता, खूब खांसता। पहले तो इस खांसी पर ध्‍यान नहीं गया। एक दिन ननिहाल में ईशू को इतनी खांसी आई कि मुंह से खून की कुछ बूंदे झिटक कर गिरीं।’

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डरे हुए बुजुर्ग तुरंत डॉक्टर के पास गए और जांच कराई। गनीमत रही कि गले में महज़ इन्फेक्शन की बात सामने आई। हालांकि, प्रीति ने डॉक्टर से वजह पूछी, तो उनके जवाब ने पूरे परिवार के कान खड़े कर दिए।

प्रीति के मुताबिक, ‘चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर जेड यू अहमद ने कहा कि ये हवा में फैले जहर के कारण हुआ है। बच्चों को बचाने के लिए उन्हें मास्क पहनाना शुरू करें। नतीजा ये हुआ कि ईशू अपने नानू-नानी के घर जाना कम कर चुका है।’

दरअसल, बढ़ते मिलों-कारखानों, गाडि़यों, कीटनाशकों और गंदगी ने शहर के पर्यावरण को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। महज 10-12 किलोमीटर के अंतर पर हवा में जानलेवा बदलाव महसूस किया जा सकता है। गोमती नगर से पांच गुना ज्यादा जहरीली हवा लालबाग की है। यह क्षेत्र व्यावसायिक है। यहां लखनऊ भर की गाडि़यां रिपेयर की जाती हैं।

आकड़े कहते हैं कि लालबाग लखनऊ का ‘बीजिंग’ है। आबोहवा इस कदर जानलेवा है कि यहां पूरे साल ‘रेड अलर्ट’ जारी रखने की जरूरत है। वैसे, बहुत वक्त नहीं गुजरा जब नवाबों के शहर को देश में सबसे प्रदूषित माना गया। यहां का एयर क्वालिटी इंडेस्क 471 प्वाइंट था। वहीं, देश की राजधानी और सबसे व्यस्त शहरों में दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेस्क कहीं बेहतर 382 प्वाइंट था।

ये बिगाड़ रहे पर्यावरण

· 23 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड गाडि़यों के धुंए से शहर की हवा जहरीली बन रही। इन गाडियों में तीन लाख से ज्यादा चौपहिया हैं।

· पेट्रोल से ज्यादा जहरीला डीजल गाडि़यों का धुंआ होता है। अवैध डीजल टैक्सियां जानलेवा धुंआ बढ़ाने में सबसे आगे हैं।

· उत्तर प्रदेश प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड हजरतगंज, महानगर, तालकटोरा, सराय माली खां, अलीगंज, अंसल सिटी और गोमतीनगर में हवा में जहरीली गैसों और धूल कणों को मापता है।

· इन सात जगहों पर रोज हवा में पार्टिकुलर मैटर 10, सल्फर डाई ऑक्साइड और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड गैस मापी जाती है। इसके बाद हर महीने रिपोर्ट बनाई जाती है।

चौंकाने वाले हैं आंकड़े
पार्टीकुलर मैटर 10 का जो स्तर अक्टूबर 2015 में लालबाग के पास हजरतगंज क्षेत्र में 167.2 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर था। वह जुलाई 2017 में 300 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक पहुंच गया। जबकि इसका स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से ऊपर जाना खतरनाक माना गया है। गोमती नगर के कुछ पॉश इलाकों में पार्टीकुलर मैटर 10 की मात्रा कम पाई गई है। सांस के साथ शरीर में जाने वाले धूल के कण पार्टीकुलर मैटर हैं। यह अलग-अलग तरह के होते हैं।

ये है सरकारी कमी
पार्टिकुलर मैटर 2.5 बहुत छोटे कण होते हैं। यह पार्टिकुलर मैटर 10 से भी छोटे होते हैं। इसका सीधा मतलब है कि ये हमारे शरीर के भीतर तक चले जाते हैं और ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। विडंबना है कि इनको मापने का कोई यंत्र प्रदूषण बोर्ड के पास नहीं है। इनका स्तर क्या है, इसके लिए अब तक बोर्ड केन्द्रीय प्रदूषण जांच एजेंसी पर निर्भर रहता है।

क्या कोशिश हुईं, क्या होनी चाहिए
· बीते साल तत्कालीन डीएम राजशेखर ने अहम फैसला लिया। तय हुआ कि शहर के किसी भी स्टैण्‍ड पर साइकिलवालों से टोकन फीस नहीं ली जाएगी। उम्मीद बनी कि लोग साइकिल ज्यादा चलाएंगे, लेकिन इससे खास फर्क नहीं पड़ा। सरकार बदली तो फैसला भी बदल दिया गया।

· अखिलेश यादव की सरकार में एक करोड़ पौधे एक साथ लगाकर पर्यावरण सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया गया था। हालांकि अब ये पौधे कहां और किस हाल में है, यह बताना वन विभाग के लिए भी टेढ़ी खीर साबित हो सकता है। वर्तमान में योगी सरकार इस दिशा में सार्थक कदम उठा सकती है। सीएम योगी आदित्यनाथ का जन्मदिन भी विश्‍व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर होता है।

· डीजल ऑटो और टेंपों का विकल्प बनकर उभरे ई-रिक्शे हवा में घुले जहर को कम करने में सहयोगी हो सकते हैं। बैट्री से चलने की वजह से इनसे धुआं नहीं निकलता और प्रदूषण की गुंजाइश न के बराबर हो जाती है। लखनऊ की सड़कों पर ई-रिक्शे लगातार बढ़ रहे हैं जो प्रदूषण कम करने के लिहाज से अच्छा है। यही हाल सीएनजी वाहनों का भी है। अगर सरकार इन वाहनों पर सब्सिडी की योजना लाए, तो लोग इनकी ओर आकर्षित हो सकते हैं और प्रदूषण का स्तर कम हो सकता है।

सिर्फ कोशिश करने से बन सकती है बात
· वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए वायु प्रदूषण रोकथाम एवं नियंत्रण एक्ट 1981 बना हुआ है।

· यूपी के सभी जिले इस एक्ट के भीतर आते हैं। एक्ट में राज्य प्रदूषण बोर्ड को कई शक्तियां दी गई हैं।

· बोर्ड किसी भी समय कोई भी फैक्ट्री भीतर तक जांच कर सकता है।

· बोर्ड के अधिकारी फैक्ट्री की चिमनी या कहीं से भी हवा का नमूना ले सकते हैं।

· बोर्ड मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर किसी भी समय फैक्ट्री को सुधार से लेकर बंद करने का निर्देश दे सकता है।

· इस एक्ट का पालन सही ढंग से होने लगे, तो तस्वीर बदल सकती है और नवाबी शहर की आबोहवा फिर से सांस लेने वाली हो सकती है।

· इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण निदेशालय में सिटीजन चार्टर लागू है। लेकिन एक भी शख्‍स इसके जरिए किसी तरह की तहकीकात नहीं करता है।

एक आदत ये भी बनाइए
आपको पेड़-पौधों के फायदे बताने की जरूरत नहीं। आप यह भी जानते होंगे कि एक पेड़ आपके लिए किस तरह से फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके बाजवूद न आप पौधे लगाते हैं, न बच्चों को इसके प्रति उत्साहित करते हैं। अगर चाहते हैं कि लखनऊ की आबोहवा बेहतर हो, तो कम से कम एक पौधा लगाइए और पेड़ बनने का इसका ख्‍याल रखिए।

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