एमएसएमई के साथ-साथ ओडीओपी एवं खादी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए आईआईए आयोजित करेगा महा अधिवेशन

संक्षेप:

  • खादी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए आईआईए आयोजित करेगा महा अधिवेशन।
  • औद्योगीकरण को बढ़ावा के लिए सुविधाओं को किया जा रहा है सुदृढ़।
  • एक ट्रिलियन इकोनॉमी को पूरा करने में रोडमैप प्रस्तुत करेगा आईआईए।

लखनऊ. अपर मुख्य सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम  नवनीत सहगल के साथ आज लोक भवन में आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष  अशोक कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक हुई।  अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार की एक ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य को पूरा करने में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम की अहम भूमिका पर आधारित एक महा अधिवेशन के आयोजन का प्रस्ताव रखा और विस्तृत चर्चा की।

औद्योगीकरण को बढ़ावा के लिए सुविधाओं को किया जा रहा है सुदृढ़

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए अवस्थापना सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। शीघ्र ही नई प्रिक्योरमेंट पालिसी लाई जा रही है। इसमें प्रदेश की एमएसएमई के लिए तमाम प्रकार सुविधाओं का प्राविधान किया गया है। नई एमएसएमई को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी खरीद में एक करोड़ तक के आर्डर पर अनुभव की बाध्यता नहीं रहेगी।

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एक ट्रिलियन इकोनॉमी को पूरा करने में रोडमैप प्रस्तुत करेगा आईआईए

आईआईए अध्यक्ष ने अवगत कराया कि आईआईए प्रदेश स्तर पर सर्वे करते हुए उद्यमियों की स्थिति को तथ्यों के साथ अक्टूबर माह में प्रस्तावित इस महाअधिवेशन में माननीय मुख्य मंत्री उत्तर प्रदेश के समक्ष प्रस्तुत करेगा और एक ट्रिलियन इकोनॉमी को पूरा करने में क्या रोडमैप/योजना होनी चाहिए यह भी प्रस्तुत करेगा। आईआईए के प्रस्ताव पर सकरात्मक प्रतिक्रिया देते हुए अपर मुख्य सचिव ने इस कार्यक्रम में पूर्ण सहयोग देने हेतु आश्वस्त किया और कहा कि एमएसएमई विभाग आईआईए के साथ कार्य करते हुए इस महा अधिवेशन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के साथ-साथ ओडीओपी एवं खादी उद्योग को भी प्रोत्साहित करेगा और बढ़ावा देगा।

कई प्रस्ताव किए गए प्रस्तुत

आईआईए अध्यक्ष द्वारा अपर मुख्य सचिव के समक्ष सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के हित में कुछ अन्य प्रस्ताव भी प्रस्तुत किये गये, जिनमे मुख्यतः जेम पोर्टल पर सभी राज्य स्तरीय पीएसयू एवं विभागों को पंजीकृत कराने की मांग, उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागों औरसार्वजनिक उपक्रमों द्वारा एमएसएमई से 25 प्रतिशत तक खरीद अनिवार्य है, परन्तु एक ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए उसे 50 प्रतिशत तक बढ़ाये जाने की आवश्यकता है। यह भी प्रस्ताव रखा गया कि एमएसएमई हेतु साथी पोर्टल की उपयोगिता एवं प्रचार-प्रसार हेतु आईआईए सहयोग प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप स्कीम या शिक्षुता प्रोत्साहन योजना को बढ़ावा देने में भी सहयोग प्रदान करेगा और इसके साथ ही सरकार द्वारा जो अप्रेंटिसशिप स्कीम में वजीफे/ अंश के रूप में 2,500 रुपये प्रदान किया जाता है उसे उद्यमी के खाते में ही प्रत्यक्ष रूप से दिया जाये, आईआईए द्वारा यह मांग की गयी।

आईआईए द्वारा ळमड पोर्टल से संबंधित भी सुझाव प्रेषित किये गये जिसके अंतर्गत जो एमएसएमई, पोर्टल पर पंजीकृत है उन्हें 3 प्रतिशत की परफॉरमेंस सिक्यूरिटी देनी पड़ती है, उसमे छूट प्रदान की जानी चाहिए। इसके साथ ही जो नई इकाइयाँ है उन्हें सरकारी टेंडर में आवेदन करने हेतु 3 साल के टर्नओवर एवं अनुभव क्लॉज़ से भी छूट प्रदान दी जाय।

आईआईए द्वारा जिला स्तर पर औद्योगिक क्षेत्रों में अवस्थापना आवश्यकताओं के सम्बन्ध में सर्वे करते हुए कुछ जिलो का विस्तृत डाटा भी अपर मुख्य सचिव को प्रस्तुत किया गया जिसपर अपर मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही इन अवस्थापना आवश्यकताओं जैसे फ्लाईओवर, रेलवे क्रासिंग पर ओवेरब्रिज, फायर स्टेशन इत्यादि को पूरा करने का प्रयास किया जायेगा, क्योंकि उद्योग ही उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बढावा देने में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम उद्यमियों की हैण्ड होल्डिंग करने के लिए तत्पर है।

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