कठुआ गैंगरेप: 8 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप मामले में 18 महीने बाद हुआ न्याय

संक्षेप:

  • कठुआ गैंगरेप मामले में अदालत ने सुनाया अहम फैसला 
  • 18 महीने बाद मिला न्याय
  • दरिंदगी की सारी हदें कर दी थी पार 

पिछले साल 10 जनवरी को 8 साल की मासूम बच्ची के साथ हुए कठुआ गैंगरेप मामले में पठानकोट की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है.  जिसमें मुख्य आरोपी सांजी राम को दोषी करार दिया है. साथ ही अन्य चार अन्य 5 भी दोषी करार दिए गए हैं. जबकि एक आरोपी को बरी कर दिया गया.  

पठानकोट की अदालत ने पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले इस सामूहिक बलात्कार के मामले में मास्टर माइंड सांजी राम, आनंद दत्ता, प्रवेश कुमार, तिलक राज, दीपक, सुरेंद्र को दोषी करार दिया गया है. जबकि एक आरोपी विशाल को बरी कर दिया गया है.

 चार्जशीट के मुताबिक, पीड़िता की 13 जनवरी को गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी. 16 जनवरी को पीड़िता का शव इलाके में ही फेंक दिया गया था. पुलिस के मुताबिक, सात दिनों तक लगातार अत्याचार सहने के बावजूद पीड़िता इसलिए मदद के लिए चीख पुकार नहीं मचा सकी, क्योंकि किडनैप किए जाने के थोड़ी ही देर बाद आरोपियों ने बच्ची को भांग खिला दी थी.

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पुलिस के मुताबिक बच्ची को किडनैप करने वाले मुख्य आरोपी 15 वर्षीय नाबालिग ने बच्ची के मुंह में जबरन भांग ठूंस दी थी, इस दौरान दूसरे आरोपी ने बच्ची के पैरों को दबाए रखा. आरोपियों ने बच्ची को कई दिनों तक मंदिर के अंदर बंधक बनाकर रखा और लगातार उसे नशीली दवाएं खिलाते रहे, जिससे कि पीड़िता अपने साथ हो रहे अत्याचार का विरोध नहीं कर सकी.

रिपोर्टस के मुताबिक घटना की जांच कर रही क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया था कि पीड़िता को एपीट्रिल 0.5 एमजी की कई गोलियां खिलाई गईं. डॉक्टरों ने पुलिस को बताया कि किसी को दिनभर में एपिट्रिल 0.5 एमजी की एक गोली से अधिक के सेवन का परामर्श नहीं दिया जाता. लेकिन आरोपियों ने पीड़िता को एक दिन में आठ गोलियां तक खिला डालीं थीं.

जांच अधिकारी ने बताया था कि 10 जनवरी, 2018 को बच्ची लापता हुई और बच्ची के माता-पिता उसे खोजते हुए अगले दिन मंदिर के पास तक गए भी. लेकिन आरोपियों ने बड़ी ही चालाकी से पीड़िता के माता-पिता को मंदिर के बाहर से ही गुमराह कर टहला दिया था.

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने किडनैपिंग के तीसरे दिन 13 जनवरी को पीड़िता की हत्या कर दी थी, लेकिन मौसम बेहद सर्द होने के चलते शव के सड़ने की कोई चिंता नहीं थी. हत्या के 3 दिन बाद 16 जनवरी तक आरोपी बच्ची के शव को मंदिर के अंदर ही रखे रहे थे.

इस पूरी घटना का मास्टर माइंड राजस्व विभाग का रिटायर्ड अधिकारी 62 वर्षीय सांजी राम है. जिसे मुख्य आरोपी बनाया गया है. उसी ने यह पूरी साजिश रची थी. रासना गांव में मंदिर के सेवादार सांझी राम ने बकरवाल समुदाय को इलाके से हटाने के लिए मासूम से गैंगरेप की साजिश रची थी. इस घटना के मास्टरमाइंड सांझी राम समेत कुल आठ लोग गिरफ्तार किए गए हैं.

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