शौर्य के 20 साल : 'कारगिल युद्ध'... जब भारतीय सेना ने फतह की दुनिया की सबसे मुश्किल जंग

संक्षेप:

  • भारतीय सेना ने 20 साल पहले दुनिया की सबसे बड़ी जंग में जीत हासिल कर पाकिस्‍तानी सेना के सैकड़ों जवानों को मार गिराया था.
  • आइए कारगिल दिवस पर आपको कारगिल के युद्ध के हर पहलू से अवगत कराते हैं.
  • अपनी यार्क खोजने गए ताशी नामक चरवाहे ने 2 मई 1999 को सबसे पहले आतंकियों के भेष में आई पाकिस्‍तानी सेना को कारगिल की पहाड़ियों पर देखा

भारतीय सेना ने 20 साल पहले दुनिया की सबसे बड़ी जंग में जीत हासिल कर पाकिस्‍तानी सेना के सैकड़ों जवानों को मार गिराया था. आइए कारगिल दिवस पर आपको कारगिल के युद्ध के हर पहलू से अवगत कराते हैं. दरअसल, अपनी यार्क खोजने गए ताशी नामक चरवाहे ने 2 मई 1999 को सबसे पहले आतंकियों के भेष में आई पाकिस्‍तानी सेना को कारगिल की पहाड़ियों पर देखा. 3 मई 1999 को ताशी ने इसकी जानकारी रास्‍ते में मिले सेना के एक जवान को दी.कारगिल की पहाड़ियों में घुसपैठियों की मौजूदगी की जानकारी दिल्‍ली सेना मुख्‍यालय के साथ साझा की गई. जिसके बाद, सेना मुख्‍यालय ने रक्षा मंत्रालय की सहमति से घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी. घाटी में मौजूद सेना की कुछ टुकडियों को कारगिल के लिए रवाना कर दिया गया. वहीं भारतीय सेना की इस हलचल को देख पहाड़ियों पर बैठे घुसपैठिये सकते में आ गए.

कारगिल की पहाड़ियों पर मौजूद इन घुसपैठियों ने भारतीय सेना की गतिविधियों के बाबत इस्‍लामाबाद में बैठे आकाओं को सूचना दी. जिसके बाद घुसपैठियों को मजबूती देने के लिए पाकिस्‍तान से भारतीय सीमा पर गोलीबारी शुरू कर दी गई. पाकिस्‍तानी तोप के गोले कारगिल मुख्‍यालय में स्थिति सेना के आयुध भंडार को निशाना बना रहे थे. 9 मई को पाकिस्‍तान की तरह से हो रही बमबारी में कारगिल का यह आयुध भंडार नष्‍ट हो गया.


इस घटना से ठीक एक दिन बाद 10 मई को पहली बार द्रास, काकसार और मुश्‍कोह सेक्‍टर में पाकिस्‍तानी घुसपैठियों को देखा गया. जिसके बाद, भारतीय सेना ने इन पाकिस्‍तानी घुसपैठियों की टोह लेने के लिए कई टुकडि़यों को रवाना किया. इसी दौरान, 14 मई 1999 को भारतीय सेना के कैप्‍टन सौरभ कालिया को पाकिस्‍तानी घुसपैठियों की मौजूदगी के बाबत खबर मिली. खबर मिलने के साथ, कैप्‍टन सौरभ कालिया अपनी टुकड़ी को लेकर पेट्रोलिंग पर निकल गए.

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कैप्‍टन सौरभ कालिया के साथ पेट्रोलिंग पर निकली इस टुकड़ी में अर्जुन राम, भंवरलाल बागारीया, भिका राम, मूल राम और नरेश सिंह भी शामिल थे. कैप्‍टन सौरभ कालिया जल्‍द ही अपने साथियों के साथ उस ठिकाने तक पहुंच गए, जहां पर पाकिस्‍तानी घुसपैठिए मौजूद थे. यहां पर कैप्‍टर सौरभ कालिया और उनके साथियों की संख्‍या महज पांच थी, जबकि घात लगाए बैठे दुश्‍मनों की संख्‍या सैकड़ो में थे. पाकिस्‍तानी घुसपैठियों ने कैप्‍टन सौरभ कालिया और उसके साथियों का अपहरण कर लिया. जिसके बाद उनकी और उनके साथियों की निमृम तरीके से हत्‍या कर दी गई.

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