लखनऊ में ज्वेलर का अपहरण, अब नेपाल पुलिस की हिरासत में, जानिए पूरा मामला

संक्षेप:

  • लखनऊ में हुआ ज्वेलर का अपहरण
  • फिलहाल नेपाल पुलिस की हिरासत में है जूलर
  • जानिए क्या है पूरा मामला

लखनऊ में पिछले कुछ दिनों में हत्या से लेकर अपहरण तक कई मामले सामने आ चुके हैं। अब किशोरीलाल सोनी नाम के 65 वर्षीय ज्वेलर को 28 सितंबर की शाम तब अपहरण कर लिया गया जब वह अपनी दुकान बंद कर वापस लौट रहे थे।

घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कुछ युवक उन्हें ज़बरदस्ती स्विफ्ट कार में बिठाकर ले जाते दिख रहे हैं। बाद में पता चला कि वह 12 साल पुराने एक मामले में नेपाल पुलिस के कब्जे में हैं जिसने उन्हें नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 28 सितंबर की शाम करीब साढ़े सात बजे किशोरीलाल सोनी अन्ना मार्किट से अपनी जूलरी की दुकान बंद कर ऐक्टिवा स्कूटी से मड़ियांव घर वापस लौट रहे थे, जब उनका अपहरण हुआ। सामने आए सीसीटीवी वीडियो में दिख रहा है कि स्विफ्ट से कुछ युवक उतरते हैं और उनका रास्ता रोकते हैं। इसके बाद स्कूटी से नीचे घसीटकर उन्हें गाड़ी में धकेल देते हैं। पीछे से बाइक पर आए दो युवकों में से एक उनकी स्कूटी लेकर गायब हो जाता है। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान भी वहां से लोग लगातार गुजरते रहे।

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किशोरीलाल के बेटे विकास सोनी ने बताया, `देर रात तक उनके घर वापस न लौटने पर मैंने मोबाइल की लोकेशन चेक की तो सीतापुर रोड पर दिखाई दी। मैं वहां पहुंचा तो सूनसान जगह थी और वहां कुछ नहीं मिला। इसके बाद मैं मड़ियांव थाने गया और सारी जानकारी वहां दी, जिसके बाद पुलिस टीम भी उन्हें ढूंढने में लग गई। मैं भी रात भर उन्हें ढूंढता रहा लेकिन कुछ पता नहीं चला और सुबह एफआईआर दर्ज की गई।` विकास के मुताबिक, 29 सितंबर को 11:45 बजे उनके घर में फोन आया और जानकारी मिली कि किशोरीलाल नेपाल पुलिस के कब्जे में हैं, जिसने उन्हें 12 साल पुराने एक मामले में नेपाल सीमा से अरेस्ट किया है। 

पुलिस के मुताबिक, आईपीसी की धारा 364 के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही थी, नेपाल का एंगल मिलने के बाद उससे भी कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। एसएसपी लखनऊ कलानिधि नैथानी ने कहा, `29 सितंबर को मड़ियांव में अपहरण का मामला दर्ज हुआ था, जांच के दौरान जिसमें सीसीटीवी फुटेज भी मिली। इसके बाद परिवार को फोन पर जानकारी दी गई कि अपहृत व्यक्ति नेपाल पुलिस के कब्जे में हैं।` उन्होंने कहा, `नेपाल पुलिस के मुताबिक , 2004 में किशोरीलाल की बेटी की नेपाल में शादी हुई थी, जिसके बाद उसके पति व परिवार के साथ लूट व हत्या की वारदात सामने आई थी। नेपाल पुलिस ने उसी सिलसिले में उन्हें हिरासत में लिया है। हम नेपाल दूतावास से संपर्क में हैं और जांच कर रहे हैं।`

विकास सोनी के मुताबिक, उनकी बड़ी बहन की शादी 2004 में नेपाल में हुई। यह शादी लखनऊ के एक गेस्ट हाउस से ही बड़े धूमधाम से की गई थी। शादी को दो साल भी पूरे नहीं हुए और 7 मार्च, 2006 को उनके पति व परिवार की अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी और उनसे लूटपाट भी हुई। इस दौरान बहन बीमार होने के चलते लखनऊ में इलाज करवा रही थी। 8 मार्च, 2006 को नेपाल में हुई वारदात की सूचना मिलते ही उनका परिवार लखनऊ से नेपालगंज (नेपाल) पहुंचा। पुलिस ने दोनों ही पक्ष के लोगों से पूछताछ की और सभी के बयान दर्ज किए गए।

विकास का कहना है कि इसके बाद करीब तीन साल से ज़्यादा वक़्त तक उनकी बहन नेपाल में रहीं लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। नेपाल पुलिस द्वारा जब भी परिवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया, सभी पहुंचे। 2009 के बाद उनकी बहन वापस भारत आ गईं, क्योंकि उनको नेपाली भाषा में धमकी भरे कुछ लेटर मिले जिनमें पैसों की मांग करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई। 2009 के बाद शांत हुआ मामला अचानक नौ साल बाद अपहरण के रूप में सामने आया।

विकास ने बताया कि उनके पिता दुकान से आते वक्त कुछ सोना घर ले आते थे, जिससे उसे तिजोरी में सुरक्षित रखा जाए, उनके पास कैश और दो मोबाइल फोन भी थे जिनका कुछ पता नहीं चला है। किशोरीलाल की स्कूटी कहां गई यह बड़ा सवाल है। इसके अलावा अगर नेपाल पुलिस सीमा से गिरफ्तारी की बात कह रही है तो किशोरीलाल को अपहरण कर वहां तक लेकर जाने वाले कौन लोग थे और क्या उन्होंने नेपाल पुलिस के निर्देश पर ऐसा किया? विकास की माने तो नेपाल पुलिस की ओर से उन्हें कोई नोटिस या जानकारी नहीं दी गई थी।

विकास ने अपने पिता के अपहरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ, पीएम नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि नेपाल पुलिस न तो उनके पिता की गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत कर रही है और न ही उनसे मिलने या बात करने दिया गया है। विकास चाहते है कि नेपाल पुलिस की हिरासत में उनके पिता का सुरक्षित होना सरकार सुनिश्चित करे, साथ ही नेपाल पुलिस की जवाबदेही तय हो। 

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