SC में निर्मोही अखाड़ा बोला- '1982 की डकैती में चोरी हो गए थे राम जन्मभूमि के रिकॉर्ड'

संक्षेप:

  • सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा से पूछा कि क्या आपके पास इस बात को कोई सबूत हैं जिससे आप साबित कर सके कि राम जन्मभूमि की जमीन पर आपका कब्जा है.
  • जवाब में निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि 1982 में एक डकैती हुई थी, जिसमें उनके कागजात खो गए.
  • इसके बाद जजों ने निर्मोही अखाड़ा से अन्य सबूत पेश करने को कहा.

नई दिल्ली: अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर मंगलवार से सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई शुरू हो गई है. आज भी ये सुनवाई अदालत में जारी है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में 5 जजों की पीठ इस मामले को सुन रही है. आज एक बार फिर ये सुनवाई आगे बढ़ रही है. मंगलवार को निर्मोही अखाड़े की तरफ से दलीलें रखी गईं और जमीन पर मालिकाना हक मांगा था. हालांकि, अभी दूसरे पक्ष की ओर से दलीलें रखना बाकी है.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जजों ने निर्मोही अखाड़ा से पूछा कि क्या आपके पास इस बात को कोई सबूत हैं जिससे आप साबित कर सके कि रामजन्मभूमि की जमीन पर आपका कब्जा है. इसके जवाब में निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि 1982 में एक डकैती हुई थी, जिसमें उनके कागजात खो गए. इसके बाद जजों ने निर्मोही अखाड़ा से अन्य सबूत पेश करने को कहा.

पूजा करना और मालिकाना हक जताना दो अलग-अलग बात है- कोर्ट

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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा से पूछा कि आप किस आधार पर जमीन पर अपना हक जता रहे हैं. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ,

`आप बिना मालिकाना हक के पूजा-अर्चना कर सकते हैं, लेकिन पूजा करना और मालिकाना हक जताना अलग-अलग बात है`

निर्मोही अखाड़ा की तरफ से वकील ने कहा कि सूट फाइल करने का मकसद ये था कि हम अंदर के कोर्टयार्ड में अपना हक जता सकें. इस अंतिम सुनवाई का दूसरा दिन है. दूसरे दिन भी निर्मोही अखाड़ा अपनी दलीलें अदालत के सामने रख रहा है. अखाड़ा इस वक्त मामले का इतिहास अदालत को समझा रहा है.

निर्मोही अखाड़ा का कहना- राम जन्मभूमि पर कब्जा दिया जाए

निर्मोही अखाड़ा की तरफ से कहा गया कि सूट किसी भी आदेश के खिलाफ कभी भी दाखिल हो सकता है. इसमें सूट दाखिल करने के लिए टाइम लिमिटेशन की जरूरत नहीं है. अखाड़ा ने कहा कि वह विवादित भूमि पर ओनरशिप और कब्जे की मांग कर रहे हैं. निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि ओनरशिप का मतलब मालिकाना हक नहीं बल्कि कब्जे से है. इसलिए उन्हें राम जन्मभूमि पर क़ब्ज़ा दिया जाए.

मंगलवार को निर्मोही अखाड़ा ने रखे ये तर्क

निर्मोही अखाड़े की तरफ से मंगलवार को जो तर्क रखे गए उसमें बताया गया कि 1850 से ही हिंदू पक्ष वहां पर पूजा करता आ रहा है. उनकी ओर से कहा गया कि 1949 से उस विवादित स्थल पर नमाज नहीं पढ़ी गई थी, ऐसे में मुस्लिम पक्ष का हक जताना पूरी तरह गलत है.

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