अयोध्या: राम मंदिर के लिए 28 साल बाद फिर शुरू हुई ‘रथ यात्रा’

संक्षेप:

  • संतों ने ली मंदिर निर्माण की शपथ
  • 6 राज्यों से होते हुए पहुंचेगी रामेश्वरम
  • रथ यात्रा पूरी तरह से अराजनीतिक

लखनऊः राम की नगरी अयोध्या से मंगलवार को ‘राम राज्य रथयात्रा’ यात्रा की शुरुआत हुई। 6 राज्यों से होकर गुजरने वाली यह रथ यात्रा राम नवमी के दिन 25 मार्च को रामेश्वरम में समाप्त होगी।

संतों ने ली मंदिर निर्माण की शपथ

बता दें कि विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय ने इस रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इससे पहले कारसेवकपुरम में संतों का सम्मलेन हुआ। इस सम्मलेन में विहिप राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक तिवारी ने संतों व हिंदू समुदाय के लोगों को अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए शपथ भी दिलाई।

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6 राज्यों से होते हुए पहुंचेगी रामेश्वरम

गौरतलब है कि अयोध्या से रवाना हुई इस रथ की लंबाई 28 फुट है, इसमें 28 खंबे लगे हुए हैं। अंदर रामजानकी और हनुमान जी की मूर्तियां विराजमान है और एक छोटा सा मंदिर भी रथ के अंदर बनाया गया है। यह 41 दिन की रथ यात्रा है जो 6 राज्यों से होते हुए 6000 किलोमीटर की दूरी तय कर कर 25 मार्च को रामेश्वरम पहुंचेगी। इस रथ यात्रा की शुरुआत सर्वप्रथम वर्ष 1999 में जगद्गुरू स्वामी सत्यानंद सरस्वती जी ने की थी, जो रामदास मिशन सोसाइटी के संस्थापक भी थे। इस यात्रा की 5 प्रमुख मांगे हैं, जिनमें राम मंदिर निर्माण, राम राज्य और स्कूल के पाठ्यक्रम में रामायण को शामिल किया जाना प्रमुख है।

रथ यात्रा पूरी तरह से अराजनीतिक

विश्व हिंदू परिषद मुख्यालय कारसेवकपुरम में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए महेश ने कहा कि रामराज्य रथ यात्रा पूरी तरह से अराजनीतिक है, जिसमें कई हिंदूवादी संगठन भी हमारी मदद कर रहे हैं। इसके माध्यम से हम 10 लाख लोगों से ज्यादा हस्ताक्षर जिसमें 10 हजार से अधिक संतों की स्वीकृति लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति को सौंपेंगे। उनसे मांग करेंगे कि विवादित जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण करा करके रामायण को सेलेबस में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ गुरुवार को साप्ताहिक अवकाश और वर्ष में एक हिंदू दिवस के रूप में घोषित किया जाए।

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