पुण्यतिथिः सीएम योगी ने दी लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि

संक्षेप:

  • लाल बहादुर शास्त्री की 52वीं पुण्यतिथि
  • सीएम योगी ने दी श्रद्धाजंलि
  • इस मौके पर गर्वनर रामनाईक भी रहे मौजूद

लखनऊः देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की आज 52वीं पुण्यतिथि है। उनकी पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लाल बहादुर शास्त्री भवन में उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के गर्वनर रामनाईक ने भी लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धाजंलि दी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए कहा कि देश के अंदर ईमानदारी और सच्चाई के रूप में छाप छोड़ने वाले शास्त्री जी का कार्यकाल अविष्वसनिय रहा है।

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बता दें लाल बहादुर शास्त्री का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके ही कुशल नेतृत्व में भारत ने 1965 के युद्ध में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी। प्रसिद्ध नारा `जय जवान, जय किसान` उन्होंने ही दिया था। भारत को आत्मनिर्भर बनाने में शास्त्री जी का बहुत बड़ा योगदान है।

पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। जब लाल बहादुर शास्त्री डेढ़ साल के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया।

लाल बहादुर के साथ `शास्त्री` जुड़ने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय, जिसे आज बीएचयू कहा जाता है। उसने 1926 में लाल बहादुर को शास्त्री की उपाधि दी थी। वो भी पढ़ाई में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए।

एक बार गंगा में नहाने के दौरान मां उन्हें नदी किनारे भूल गईं थीं। उस वक्त शास्त्री जी केवल तीन महीने के थे। दूधमुंहे बच्चे के गुम होने से परेशान मां ने पुलिस में एफआईआर दर्ज करा दी। काफी पड़ताल के बाद शास्त्री जी एक चरवाहे के पास मिले। उस चरवाहे की कोई संतान नहीं थी। ऐसे में वो शास्त्री जी को देने को तैयार नहीं था। काफी मशक्कत और पुलिसिया सख्ती के बाद उस चरवाहे ने नन्हे शास्त्री जी को लौटाया।

ये कम ही लोगों को मालूम होगा कि उत्तरप्रदेश में मंत्री रहते वक्त, लाल बहादुर शास्त्री ही पहले शख्स थे, जिन्होंने लाठीचार्ज के बजाए प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल शुरू किया।

बचपन में दोस्तों के साथ शास्त्री जी गंगा नदी के पार मेला देखने गए थे। वापस लौटते के समय उनके पास नाव वाले को देने के लिए पैसे नहीं थे और दोस्तों से पैसे मांगना उन्होंने ठीक नहीं समझा। बताया जाता है कि उस समय गंगा नदी भी पूरे उफान पर थी। उन्होंने दोस्तों को नाव से जाने के लिए कह दिया और बाद में खुद नदी तैरकर पार की।

आज जब शादी में लोगों को बड़े-बड़े गिफ्ट मिलते हैं, तब शास्त्री जी लाखों लोगों के लिए मिसाल है। क्योंकि उन्होंने अपनी शादी में दहेज के रुप में केवल एक खादी का कपड़ा और चरखा लिया था।

शास्त्री जी भले ही देश के प्रधानमंत्री रहे हों, मगर सादगी ऐसी कि वो कहीं भी धोती-कुर्ता पहने ही पहुंच जाते थे। यही वजह थी कि एक बार जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें असभ्य कहा था।

शास्त्री जी अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। एक बार उनके बेटे को एक विभाग में अनुचित प्रमोशन मिल गया। फिर क्या था, जानकारी लगते ही शास्त्री जी ने इस फैसले को पलट दिया।

साल 2004 में उनकी जन्म शताब्दी के मौके पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने उनके नाम पर सौ रुपये का सिक्का जारी किया था। हालांकि ये सिक्का प्रचलन में नहीं लाया गया। केवल ऑर्डर पर ही इसे उपलब्ध कराया जाता है।

लाल बहादुर शास्त्री ने 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में आखिरी सांस ली। हालांकि उनकी मौत को लेकर आज भी संदेह जताया जाता है।

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