मदरसों पर बयान देकर फंसे रिजवी, जमीयत उलेमा ने भेजा लीगल नोटिस

संक्षेप:

  • मदरसों पर बयान देकर फंसे रिजवी
  • जमीयत उलेमा ने भेजा लीगल नोटिस
  • 20 करोड़ रुपये के मानहानि का दावा किया गया

लखनऊः यूपी शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी मदरसों पर बयान देकर फंस गए हैं. उनके खिलाख लीगल नोटिस भेजा गया है. जमात-ए-उलेमा हिंद संस्था का आरोप है कि रिजवी ने 9 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखी अपनी चिट्ठी में मदरसों को लेकर विवादित बात कही है.

यह नोटिस जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द के मुस्तकीन एहसान आजमी की ओर से भेजा गया है. इस लीगल नोटिस में रिजवी को 20 करोड़ रुपये के मानहानि का दावा किया गया है. इसी के साथ जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द ने वसीम रिजवी से उनके बयान पर बिना किसी शर्त माफी मांगने को भी कहा गया है.

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के प्रमुख ने अपने चिट्ठी में कहा था कि देश में मदरसों को बंद कर दिया जाए, ऐसे इस्लामी स्कूलों में दी जा रही शिक्षा छात्रों को आतंकवाद से जुड़ने के लिए प्रेरित करती है. चिट्ठी में आरोप लगाया गया है कि मदरसों में दी जा रही शिक्षा आज के माहौल के हिसाब से प्रासंगिक नहीं है और इसलिए वे देश में बेरोजगार युवाओं की संख्या को बढ़ाते हैं.

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रिजवी ने कहा कि मदरसों से पास होने वाले छात्रों को रोजगार मिलने की संभावना अभी काफी कम है और उन्हें अच्छी नौकरियां नहीं मिलतीं. ‘‘अधिक से अधिक, उन्हें उर्दू अनुवादकों या टाइपिस्टों की नौकरियां प्राप्त होती हैं.’’ शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने दावा किया कि देश के अधिकतर मदरसे मान्यताप्राप्त नहीं हैं और ऐसे संस्थानों में शिक्षा ग्रहण करने वाले मुस्लिम छात्र बेरोजगारी की ओर बढ़ रहे हैं.

उन्होंने दावा किया कि ऐसे मदरसे लगभग हर शहर, कस्बे, गांव में खुल रहे हैं और ऐसे संस्थान ‘‘ गुमराह करने वाली धार्मिक शिक्षा’’ दे रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मदरसों के संचालन के लिए पैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी आते हैं तथा कुछ आतंकवादी संगठन भी उनकी मदद कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में शिया बोर्ड ने मांग की है कि मदरसों के स्थान पर ऐसे स्कूल हों जो सीबीएसई या आईसीएसई से संबद्ध हों और ऐसे स्कूल छात्रों के लिए इस्लामिक शिक्षा के वैकल्पिक विषय की पेशकश करेंगे. बोर्ड ने सुझाव दिया है कि सभी मदरसा बोर्डों को भंग कर दिया जाना चाहिए.

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