कल सैफई आज गोरखपुर महोत्सव, फिर अखिलेश और योगी में अंतर ही क्या ?

संक्षेप:

  • गोरखपुर महोत्सव में मासूमों की चीख की गूंज
  • तो सैफई महोत्सव में दंगों के जख्म
  • वहीं नाच, वहीं गाना आज भी फिर बदला क्या है?

By: सोनू कुमार झा

लखनऊ: कल तक जो सैफई महोत्सव था आज सूबे की सत्ता बदलने के साथ ही गौरखपुर महोत्सव में बदल गया है. योगी भी गोरखपुर महोत्सव वैसे ही आयोजित कर रहे हैं जैसे सत्ता में रहते समाजवादी पार्टी सैफई में कराया करती थी. जो लोग तब के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर सवाल उठा रहे थे, वे ही अब उन्हीं अखिलेश के सवालों के घेरे में हैं. कुर्सी पर योगी आदित्यनाथ बैठे हैं लिहाजा निशाने पर भी तो वही होंगे.

दरअसल सितंबर 2013 में मुजफ्फर नगर में दंगे हुए थे और उसी साल दिसंबर में सैफई में खूब नाच गाने हुए. तब दंगा पीड़ितों का नाम लेकर बीजेपी ने मुलायम और अखिलेश को टारगेट किया. लेकिन वहीं सवाल पूछने वाले गोरखपुर में बच्चों की मौत होने के बाद अब वहां महोत्सव में मशगूल हैं. सैफई की तरह ही गोरखपुर में भी पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है. गोरखपुर महोत्सव में भी ग्लैमर भरपूर है. बॉलीवुड नाइट से लेकर भोजपुरी नाइट तक.

ये भी पढ़े : नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी की हालत बेहद गंभीर, सीएम योगी ने जाना हाल


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इसका समापन करने वाले हैं. ऐसे में ये सवाल उठना लाजमी है कि तब अखिलेश और योगी सरकार में अंतर ही क्या है. हालांकि सत्ताधारी बीजेपी की ओर से ये समझाने की कोशिश हो रही है कि सैफई से अलग गोरखपुर के कार्यक्रम में भारतीयता, राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भरमार है.

सैफई हो या गोरखपुर दोनों ही महोत्सव आम लोगों के लिए भला क्या मायने रखते हैं? आखिर ये महज सत्ता पक्ष के राजनीतिक रसूख और गुजरे जमाने के राजसी ठाट की नुमाइश भर ही तो है.

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Read more Lucknow Hindi News here. देशभर की सारी ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के लिए NYOOOZ HINDI को सब्सक्राइब करें |

Related Articles