'कब्रगाह' बनती रही हैं यूपी की जेलें, मुन्ना बजरंगी ने की थी शुरुआत!

उत्तर प्रदेश की बागपत जेल में ​माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या को लेकर एक बार​ फिर यूपी की जेल व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर चिंता जताई है और पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह की अगुवाई में एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है. ये कमेटी उत्तर प्रदेश की जेल व्यवस्था में सुधार को लेकर दो महीने में सरकार को अपनी रिपोर्ट देगी. तस्वीर का दूसरा पहलू ये है कि उत्तर प्रदेश की जेलें हत्याओं के लिए बदनाम रही हैं. वाराणसी से लेक​र गाजियाबाद की जेलें तमाम हत्याओं की गवाह रही हैं. यहां जेल के अंदर असलहे पहुंचाना हो या जेलकर्मियों से सांठगांठ कर बैरक में सुख सुविधाएं हासिल करनी हों, सब संभव माना जाता है. मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद जागी सरकार, यूपी की जेलों की व्यवस्था सुधारने को गठित की कमेटी खुद मुन्ना बजरंगी ने भी जेलों की इस कुव्यवस्था का पूरा फायदा उठाया. उसने अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने के लिए भी जेल का इस्तेमाल किया. 2004 में ऐसी ही एक वारदात में मुन्ना के शूटरों ने वाराणसी जेल में सपा के पार्षद वंशी यादव की गोली मारकर हत्या कर दी थी. उसमें मुन्ना बजरंगी गैंग के शूटर अनुराग त्रिपाठी उर्फ अन्नू त्रिपाठी और बाबू यादव का नाम सामने आया था. कहा जाता है कि पूर्वांचल की किसी जेल में हत्या का यह पहला मामला था. इसके बाद तो हत्याओं का जो दौर शुरू हुआ, वह अब तक जारी है. ...जब कई गोलियां खाने के बाद मॉर्च्युरी में 'जिंदा' हो गया था मुन्ना बजरंगीवंशी यादव की हत्या के एक साल बाद ही वाराणसी जेल में अन्नू त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस हत्या से सबसे ज्यादा नुकसान मुन्ना बजरंगी को हुआ.  जेलों में सुरक्षा पर पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह कहते हैं कि यूपी में संगठित गिरोह को रोकने में यूपी एसटीएफ और यूपी पुलिस ने बहुत अच्छा कार्य किया लेकिन मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या बता रही है कि कहीं न कहीं ये गैंगवॉर बहुत आगे तक जा चुका है. इन लोगों ने राजनीतिक स्तर पर अपनी एक पैठ बना रखी है. उन्होंने कहा कि बिना पैठ के किसी भी गिरोह के लिए जेल के अंदर हत्या कराना संभव नहीं है. 10 साल में कई मौतों पर उठे सवाल 2008 में गाजियाबाद की डासना जेल में कविता हत्याकांड के आरोपी रविंद्र प्रधान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत. 2009 में डासना जेल में ही बस विस्फोट कांड के आरोपी शकील अहमद की मौत, उठे सवाल 2011 में लखनऊ जिला जेल में सीएमओ हत्याकांड के आरोपी डॉ वाईएस सचान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत. 2012 में मेरठ जिला जेल में अधिकारियों द्वारा तलाशी लेने के दौरान विवाद हो गया. नाराज बंदियों ने जेल कर्मियों पर हमला बोल दिया. पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें एक बंदी मेहरादीन उर्फ बाबू खां की मौके पर मौत हो गई. वहीं 6 दिन बाद 24 अप्रैल को इलाज के दौरान गंभीर रूप से घायल सोमवीर की मौत हो गई. 2012 ​में ही कानपुर देहात की जिला जेल में विवाद के दौरान बंदी राम शरण सिंह भदौरिया की मौत. 2014 में गाजीपुर जिला जेल में बंदियों व जेलकर्मियों के बीच खूनी संघर्ष हुआ. हालात काबू में करने के लिये फायरिंग की गई, जिसमें एक बंदी विश्वनाथ प्रजापति की मौत हो गई. 2015 में मथुरा जेल में बंदियों के दो गुटों में संघर्ष हुआ. इसमें एक बंदी ने रिवॉल्वर से दूसरे बंदी पिंटू उर्फ अक्षय सोलंकी की हत्या कर दी.  यही नहीं घटना में घायल दूसरे बंदी राजेश टोटा को आगरा मेडिकल ले जाते समय बदमाशों ने रास्ते में हमला कर उसकी हत्या कर दी. 2016 की 25 जून को मुजफ्फरनगर जेल में बंद सुक्खा ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर कैदी चंद्रहास की पीट-पीटकर हत्या कर दी. इसके बाद जून में सुक्खा को सहारनपुर जेल शिफ्ट किया गया. यहां अगस्त में सुक्खा की चम्मच से गला रेतकर हत्या कर दी गई. पुलिस ने मामले में शाहनवाज उर्फ प्लास्टिक को गिरफ्तार किया. 2018 बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या. ये भी पढ़ें:  जानिए यूपी के सबसे बड़े गैंगवार की कहानी, मुन्ना बजरंगी तो महज एक शूटर के किरदार में था मुन्ना बजरंगी ने कभी BJP विधायक कृष्णानंद राय को किया था AK-47 से छलनी।

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