हमारे समय के सुकरात का जाना... दुनिया ए फानी से रुखसत हुए पूर्व सांसद और जाने-माने बुद्धिजीवी देवी प्रसाद त्रिपाठी

संक्षेप:

  • एनसीपी के सीनियर नेता और पूर्व सांसद डीपी त्रिपाठी का गुरुवार को निधन हो गया.
  • पिछले साल ही राज्यसभा से उनका कार्यकाल समाप्त हुआ था.
  • अपने विदाई भाषण में उन्होंने सेक्स के मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि आज तक इस पर संसद में चर्चा नहीं हुई, जबकि गांधी जी और लोहिया ने भी इस पर बात की थी. 

नई दिल्ली: एनसीपी के सीनियर नेता और पूर्व सांसद डीपी त्रिपाठी का गुरुवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमारियों से पीड़ित थे। दिल्ली के अस्पताल में उनका निधन हुआ। एनसीपी के सीनियर नेता प्रफुल्ल पटेल ने पूर्व सांसद डीपी त्रिपाठी के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने कहा, `अपने सहयोगी डीपी त्रिपाठी के निधन से गहरा सदमा लगा है। उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।` एनसीपी के मुखिया शरद पवार का उन्हें बेहद करीबी माना जाता था।

फिलहाल डीपी त्रिपाठी एनसीपी के महासचिव के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पिछले साल ही राज्यसभा से उनका कार्यकाल समाप्त हुआ था। अपने विदाई भाषण में उन्होंने सेक्स के मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि आज तक इस पर संसद में चर्चा नहीं हुई, जबकि गांधी जी और लोहिया ने भी इस पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि सेक्स से जुड़ी बीमारियों के चलते मौतें होती हैं, लेकिन कभी इस पर बात नहीं हुई।

त्रिपाठी ने कहा था, जहां कामसूत्र लिखा, वहां संसद में सेक्स पर बात क्यों नहीं

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उन्होंने कहा कि जिस देश में कामसूत्र जैसी पुस्तक लिखी गई थी, वहां की संसद में सेक्स जैसे विषय पर कभी बात नहीं की गई। इस पुस्तक को लिखने वाले वात्स्यायन को ऋषि का दर्जा प्राप्त था। अजंता-अलोरा की गुफाएं और खजुराहो के स्मारक इसी पर समर्पित हैं, लेकिन कभी संसद तक में यह मसला नहीं उठा। 1968 में राजनीति में आए डीपी त्रिपाठी को संसद के अच्छे वक्ताओं में शुमार किया जाता था। आपातकाल में आंदोलन के चलते वह जेल भी रहे थे।

हमारे समय के सुकरात का जाना...

जाने माने वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और बुद्धिजीवी राघवेंद्र दुबे ने पूर्व सांसद डी पी त्रिपाठी के निधन के बाद बहुत ही भावनात्मक पोस्ट लिखी है. राघवेंद्र दुबे ने इस महान शख्सियत के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनके विराट व्यक्तित्व का आकलन किया है.  

साहित्य के गंभीर पाठक थे

हिन्दी के चर्चित लेखक अशोक कुमार पांडेय ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते लिखा है कि राज्यसभा के पूर्व सांसद और जाने-माने बुद्धिजीवी देवी प्रसाद त्रिपाठी जिन्हें हम डीपीटी के नाम से जानते थे, आज दुनिया ए फानी से रुखसत हो गए। उन्हें सुनना एक ट्रीट था। आंखों और स्वास्थ्य की असाध्य परेशानियों के बावजूद उनकी सक्रियता प्रेरक थी।

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