गोमती के प्रदूषण को लेकर NGT सख्त, कहा- सफाई के लिए जमा करें 100 करोड़ की गारंटी

संक्षेप:

  • गोमती नदी में बढ़ते प्रदूषण से नाराज नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रदेश की योगी सरकार से 100 करोड़ रुपये की गारंटी जमा कराने को कहा है.
  • साथ ही यह भी कहा है कि अगर दो साल में गोमती साफ नहीं हुई तो इस राशि को हर्जाने के तौर पर जब्त कर लिया जाए.
  • नगर निगम और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को भी जिम्मेदार बताया.

लखनऊ: गोमती नदी में बढ़ते प्रदूषण से नाराज नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की अनुश्रवण समिति ने प्रदेश की योगी सरकार से 100 करोड़ रुपये की गारंटी जमा कराने की सिफारिश की है. अनुश्रवण समिति के चेयरमैन जस्टिस डीपी सिंह ने एनजीटी को भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गोमती नदी की सफाई और एनजीटी के आदेशों के अनुपालन की गारंटी के लिए यह फंड जमा कराया जाए. साथ ही यह भी कहा है कि अगर दो साल में गोमती साफ नहीं हुई तो इस राशि को हर्जाने के तौर पर जब्त कर लिया जाए.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गोमती नदी के अभी तक स्वच्छ न हो पाने के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार है. जिसकी वजह से मुख्य सचिव और अन्य जिम्मेदार अधिकारी संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने में असफल रहे हैं.

नगर निगम और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को भी जिम्मेदार बताया

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समिति की रिपोर्ट में बढ़ते प्रदूषण के लिए नगर निगम और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को भी जिम्मेदार बताया गया है. यूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड पर 6.84 करोड़ और नगर निगम पर 5 करोड़, जल निगम पर 3 करोड़ जुर्माने की भी सिफारिश की गई है. गोमती नदी के बहाव वाले 10 जिलों में भी नगर निगम और नगर पालिकाओं पर 1-1 करोड़ रुपये जुर्माने की सिफारिश एनजीटी से की गई है. दरअसल नदियों एवं जलाशयों के प्रबंधन को बनी अनुश्रवण समिति ने यह सिफारिश पिछले दिनों सचिव व पूर्व जिला जज राजेंद्र सिंह, एडवोकेट कमिश्नर चेतनरायन सिंह और यूपीपीसीबी व सीपीसीबी के अधिकारियों के अलग-अलग निरीक्षण के बाद मिली आख्या के आकलन के बाद की है.

लखनऊ में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर

अनुश्रवण समिति राजधानी लखनऊ के अलग-अलग जगहों पर नदी से पानी के नमूने लेकर जांच कराई, जिसमें ऑक्सीजन की मात्रा शून्य के करीब मिली, जो खतरनाक है. अनुश्रवण समिति के सचिव राजेंद्र सिंह का कहना है कि 100 करोड़ का फंड प्रमुख सचिव वित्त अनुपालन गारंटी के रूप में जमा कराना सुनिश्चित कराएंगे. अगर दो साल में सभी नाले बिना शोधन के नदी में गिरना बंद न हुए तो पर्यावरणीय हर्जाने के रूप में इस राशि को जब्त कर लिया जाएगा.

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