प्रदेश में अब सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन पर रोक लगेगी

डीजीपी ओपी सिंह ने कहा सार्वजनिक जगहों पर ऐसे किसी धार्मिक कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी जिससे लोगों को परेशानी हो।

मेरठ और अलीगढ़ में पिछले दिनों यह व्यवस्था लागू की गई थी, जिसे अब पूरे प्रदेश में प्रभावी किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी करते हुए डीजीपी ने कहा कि धार्मिक आयोजनों को लेकर जो व्यवस्था अलीगढ़ से शुरू होकर मेरठ में अंतिम रूप में आई, उसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।  इसके तहत सड़क पर या अन्य किसी सार्वजनिक स्थान पर नमाज अथवा किसी और धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

गौरतलब है कि कुछ लोगों ने इस रोक का विरोध भी किया था पर सुरक्षाबलों का प्रयोग कर नई व्यवस्था को सख्ती के साथ लागू कराया गया था। प्रियंका हो सकती हैं यूपी में सीएम पद की प्रत्याशी, कांग्रेस की अभी से मैदान में उतरने की तैयारी डीजीपी ने कहा कि कानून व्यवस्था और जन सुविधा को प्रभावित करने वाले धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाने के लिए मेरठ मॉडल को प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।

इस बार बकरीद के मौके पर प्रतिबंधित पशुओं जैसे ऊंट आदि की कटान भी रोकी गई।  साथ ही जो पशु काटे गए उनको ढक कर लाया-ले जाया गया और उसका सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं करने दिया गया।

उन्होंने कहा कि सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अथवा अन्य धार्मिक आयोजन पर लगाया गया प्रतिबंध आगे भी जारी रहेगा।

इसे लेकर पुलिस महानिदेशक मुख्यालय से जरूरी जल्द निर्देश लागू किए जाएंगे। क्या है मेरठ मॉडल मेरठ में ईद-उल-अजहा से पहले ऊंट की कुर्बानी देने व सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर रोक लगा दी गई थी।

इसका विरोध किए जाने पर कहा गया था कि सड़क अथवा सार्वजनिक स्थान पर किसी ऐसे धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी जिससे लोगों को परेशानी हो।

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