रंगमंच पर जीवित हुए भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर

संक्षेप:

वाल्मिकी रंगशाला, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के परिसर में गोरखपुर से आई नाट्य संस्था `रूपांतर नाट्य मंच` ने भोजपुरी नाटक `कहत भिखारी` का मंचन किया। नाटक का निर्देशन सुनील जायसवाल के द्वारा किया गया था, जो NSD डिप्लोमा (Ext.program) के साथ `लोक रंगमंच’` के क्षेत्र में, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जूनियर और सीनियर फेलोशिप प्राप्त है, नाट्यलेख अपर्णेश मिश्र का था।

गोरखपुर के कलाकारों की यह प्रस्तुति दर्शकों के अंतर्मन में बस गई और उन्होंने इसका भरपूर आनंद उठाया। भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले, लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के जीवन से प्रेरित इस नाटक में नृत्य और संगीत के साथ साथ भोजपुरी के लोक संस्कृति को लुभावने और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया गया।

लोक की सादगी लिए और बिना किसी ताम झाम के जनसाधारण से जुड़े सामाजिक विषयों पर गंवई शैली में भिखारी ठाकुर के लोककर्म की झलकियां पूरे नाटक में देखने को मिलीं। गीतों और प्रसंगों से सजे हुए कलाकारों के अभिनय ने भोजपुरी के महानायक भिखारी ठाकुर को मंच पर जीवंत कर दिया। वस्तुतः इस नाटक में भिखारी ठाकुर की जीवनी नहीं दिखाई गई है, बल्कि यह उनके कलाकार बनने के दौरान के संघर्षों, चुनौतियों और फिर उनके सामाजिक यथार्थों के वाहक बनने की कहानी है। भिखारी ठाकुर की ’नाच’ शैली में खेला गया यह नाटक एक सच्चे कलाकार के अंदर की कसमसाहट, तड़प और समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ उसकी रचनाधर्मिता और फिर एक भाषा का महानायक बनने की बात कहता है।

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भिखारी ठाकुर के द्वारा रचित `बिरहा बहार’, ’कलजुगी प्रेम’, ’बेटी-वियोग’, ’गबरघिचोर’, ’बिदेसिया’ जैसे चर्चित कृतियों के पात्रों और घटनाओं का क्रमिक विकास को इस नाटक में बड़े ही रोचक तरीके से दर्शाया गया।


मंच पर बूढ़े भिखारी ठाकुर का अभिनय कर रहे अपर्णेश मिश्र ने अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय किया तथा सूत्रधार के तौर पर नाटक एक कड़ी में बंधने का कार्य किया । युवा भिखारी के रूप में आदित्य राजन तथा विभिन्न भूमिकाओं में निशिकांत, पवन, हरिकेश, सुरभि, शिवांगी, मनीष, सनोज, प्रदीप, श्रेयांश ने शानदार अभिनय किया, संगीत दल में शगुन, आर्यन व ढोलक पर पवन ने अपनी मधुर प्रस्तुति से दर्शकों को करतल ध्वनि के लिए मजबूर कर दिया। विशेष बात यह रही कि नाटक के अधिकतर पात्र भोजपुरी भाषी नहीं है फिर भी उन्होंने इस भाषा के भाव को अच्छे तरीके से निभाया। भिखारी ठाकुर के दो प्रमुख किरदारों के अलावा नाटक के सभी पात्र कई बार अलग-अलग भूमिकाओं में दिखे, साथ ही साथ उन्होंने ही भोजपुरी अंचल के लोक शैली के नृत्यों जैसे धोबिया नाच, लौंडा नाच और लोक गीतों को बखूबी प्रस्तुत किया।

भिखारी ठाकुर भोजपुरी भाषी थे, इसलिए उनके जीवन से जुड़े इस नाटक को भोजपुरी भाषा में खेलना न्यायपूर्ण रहा, हालांकि इसमें गोरखपुर और आस पास के क्षेत्रों में बोली जाने वाली भोजपुरी का प्रयोग किया गया है जबकि भिखारी ठाकुर के छपरा की भोजपुरी थोड़ी भिन्न है, इस नाटक के लिए यह भी अपने आप में एक प्रयोगात्मक व्यवहार है।

नाटक में नाट्यलेख सहायक और संगीत निर्देशक के रूप में आदित्य राजन, प्रकाश व्यवस्था राजनाथ वर्मा, रूप सज्जा निशिकांत पाण्डेय और देवयानी तथा मंच प्रबंधन तविशी मिश्रा का रहा ।

नाटक का पूरा फोर्मेट इतना गतिमान था की स्टेज पर किसी भी प्रोपटी का न होना खला नहीं, जिसे अभिनय से बखूभी कवर भी किया गया l ग्रुप ऑफ़ आर्टिस्ट द्वारा विभिन सीन में अलग अलग रोल करते हुए खुबसूरत ग्राफ मंच पर दिखा l 1968 से लगातार उत्क्रिस्ट नाट्य प्रस्तुति देने वाली नाट्य संस्था ‘रूपांतर नाट्य मंच’ की यह भोजपुरी प्रस्तुति दर्शको व critic द्वारा बहुत सराही गई l

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