यूपी में पॉलिथीन बैन: इस्तेमाल करने पर मिलेगी ये सजा

संक्षेप:

  • यूपी में पॉलिथीन बैन
  • उल्लंघन करने पर मिलेगी ये सजा
  • योगी सरकार ने दिए थे आदेश

लखनऊ: योगी सरकार ने यूपी में 15 जुलाई से पॉलिथीन पर बैन के आदेश दिए थे, जिसके बाद अब प्रदेश  में 50 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन का इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। प्रदेश सरकार इसके लिए अध्यादेश भी लाने जा रही है।

पॉलिथीन का प्रयोग करने पर पकड़े जाना दंडनीय अपराध होगा। पॉलिथीन पर बैन लगाने वाला यूपी देश का 19वां राज्य होगा। इस संबंध में मुरादाबाद नगर निगम के सिटी कमिश्नर अवीश कुमार का कहना है कि शहर में चार टीमें गठित कर दी गई हैं। उनको  50 माइक्रोन से नीचे पॉलिथीन और प्लास्टिक की वस्तुओं को जब्त करने का निर्देश दिया गया है। हमने कपड़ों के बैग बनाए हैं जो जागरूकता पैदा करने के लिए लोगों के बीच वितरित किए जाएंगे।

गौरतलब है एनजीटी के आदेश पर पहले भी सूबे में पॉलिथीन बैन लगाया गया था, लेकिन अमल में लापरवाही के चलते प्रतिबंध नहीं लगाया जा सका। इस बार योगी सरकार ने 15 जुलाई से सूबे में पूर्ण रुप से पॉलिथीन बैन का आदेश दिया था। सरकार का सख्त निर्देश था कि 15 जुलाई के बाद किसी भी व्यक्ति के पास या किसी विक्रेता के पास अगर पॉलिथीन बैग पाई जाती है तो उसको जब्त करके संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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वहीं पॉलिथीन बैग पर बैन के अमल पर सवाल उठाते हुए सूबे के छोटे व्यापारियों का कहना है कि अगर सरकार को पॉलिथीन बैन ही करना है तो सबसे पहले फैक्ट्रियों और विक्रेताओं पर पॉलिथीन बनाने और बेचने पर प्रतिबंध लगाए, क्योंकि छोटे दुकानदार उनसे ही पॉलिथीन खरीदते हैं। वहीं मिट्टी के बर्तन का कारोबार करने वाले व्यापारियों ने कहा कि जबसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्लास्टिक पर बैन लगाने की बात कही है मिट्टी के बर्तनों खासकर कुल्हड़ और मिट्टी की कटोरियों के कारोबार में दोगुना उछाल आ गया है।

आदेश में पॉलिथीन बनाने से लेकर बेचने व स्टोर करने पर प्रतिबंध होगा। साथ ही प्लास्टिक के कप, ग्लास और पॉलिथीन के सभी तरह के कैरीबैग के इस्तेमाल पर अब जुर्माना लगेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर 50 हजार रुपये तक जुर्माना या छह माह तक की सजा होगी। इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के लिए सरकार छापामारी का अभियान चलाएगी. जिला प्रशासन, नगरीय निकाय, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीमें गठित की गई हैं।

गौरतलब है कि इसके पहले दिसंबर 2015 में अखिलेश सरकार ने सूबे में पॉलिथीन के कैरीबैग्स पर प्रतिबंध लगाया था। इसके लिए सरकार ने एन्वायर्नमेंट प्रटेक्शन एक्ट को भी मंजूरी दी थी। एक्ट में व्यवस्था थी कि अगर कोई प्रतिबंधित पॉलिथीन का इस्तेमाल करता पाया जाएगा तो उसे छह महीने की सजा और पांच लाख रुपये तक जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।

इस अधिनियम को पर्यावरण विभाग ने बनाया था और इसे लागू करने की जिम्मेदारी संयुक्त रूप से नगर निगम, जिला प्रशासन, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को दी गई थी। एक्ट में प्रतिबंधित पॉलीथीन की मोटाई 20 माइक्रॉन या उससे कम रखी गई थी, जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रतिबंधित पॉलीथीन की मोटाई 50 माइक्रॉन या उससे कम तय की है।

सूबे में पॉलिथीन के प्रयोग पर प्रतिबंध की कवायद वर्ष 2000 में शुरू हुई थी, लेकिन अलग-अलग कानूनों के चलते अब तक इस पर सही से अमल नहीं हो सका। नगर विकास विभाग ने वर्ष 2000 में ‘उप्र प्लास्टिक और अन्य जीव अनाशित कूड़ा-कचरा अधिनियम’ लागू किया था। इसके तहत 20 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन के उपयोग पर प्रतिबंध है।

पर्यावरण विभाग की 22 दिसंबर 2015 में जारी अधिसूचना में पॉलिथीन (कैरी बैग) के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 50 माइक्रॉन से कम पॉलिथीन को पर्यावरण के लिए खतरनाक बताया।

अलग-अलग प्रावधानों से पॉलिथीन के प्रयोग पर प्रतिबंध का मामला उलझता रहा। लेकिन अब शासन ने सभी तरह के संशयों को दूर करते हुए केंद्र सरकार के एक्ट के मुताबिक 50 माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है। प्रदेश में 50 मॉइक्रॉन पूर्ण प्रतिबंध के साथ ही यूपी पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने वाला देश का 19वां राज्य बन जाएगा।

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