लोकसभा चुनाव के दौरान UP में शराब बिक्री का टूटा रिकॅार्ड, जानिए क्या कहते हैं आंकड़े

संक्षेप:

  • लोकसभा चुनाव 2019 के सातवें और अंतिम चरण के लिए यूपी की 80 सीटों पर मतदान रविवार को खत्म हो गया
  • अब 23 मई को रिजल्ट आएंगे. आमतौर पर चुनावों में शराब की खपत बढ़ जाती है
  • मतदाताओं को प्रलोभन देने के नाम पर राजनीतिक दलों व प्रत्याशियों पर शराब बांटने का आरोप भी लगता रहा है

लोकसभा चुनाव 2019 के सातवें और अंतिम चरण के लिए यूपी की 80 सीटों पर मतदान रविवार को खत्म हो गया. अब 23 मई को रिजल्ट आएंगे. आमतौर पर चुनावों में शराब की खपत बढ़ जाती है. मतदाताओं को प्रलोभन देने के नाम पर राजनीतिक दलों व प्रत्याशियों पर शराब बांटने का आरोप भी लगता रहा है. हम आपको बताते हैं कि चुनाव के दौरान यूपी में कितनी हुई शराब की बिक्री?

अंग्रेजी शराब के थोक विक्रेता भट्ट सेल्स के मालिक ए.भट्ट ने मीडिया से बातचीत में बताया कि साल 2018 में हमने 3.75 करोड़ की सेल की थी. वहीं 2019 में मार्च तक हम अबतक 4.25 करोड़ की शराब बेच चुके है. भट्ट दावा करते हुए कहते हैं कि स्थानीय चुनाव और विधानसभा के चुनाव के दौरान देसी और अंग्रेजी शराब की खपत बढ़ जाती है. लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान इसकी बिक्री पर कुछ खासा असर नहीं पड़ता है. उन्होंने बताया कि साल 2014 के मुकाबले 2019 में शराब की खपत थोड़ी बढ़ी है.

यूपी के एडिशनल आबकारी आयुक्त ओपी आर्य ने बताया कि आचार संहिता लागू होने के बाद निर्वाचन आयोग को देशी, विदेशी शराब और बियर की जो बिक्री हुई है इसकी रिपोर्ट हम लोग रोजाना देते रहे हैं. आर्य ने बताया कि 10-15 प्रतिशत की ग्रोथ होती है. आबकारी आयुक्त ने बताया कि एलेक्शन के दौरान 2014 में आबकारी विभाग का रेवेन्यू 15-16 हजार करोड़ का होता था, वहीं यह आंकड़ा अब बढ़कर 24 हजार करोड़ हो गया है. ओपी आर्य भी दावा करते हैं कि पार्लियामेंट्री इलेक्शन में शराब की बिक्री का ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है. उन्होंने कहा कि एक से दो प्रतिशत सेल की बढ़ जाती है.

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