अयोध्या केस: SC ने डेडलाइन एक दिन घटाई, अब दोनों पक्षों को 17 अक्टूबर तक पूरी करनी होगी बहस

संक्षेप:

  • सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादित जमीन में बहस के लिए दी डेडलाइन 1 दिन कम कर दी है.
  • कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्देश दिया है कि 17 अक्टूबर तक वह अपनी दलील रख दें.
  • इसके बाद 4 सप्ताह का वक्त 5 जजों की संवैधानिक पीठ लेगी और केस पर अपना फैसला सुनाएगी. 

नई दिल्ली: अयोध्या विवादित जमीन मामले में सुनवाई की तारीख आज सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन कम कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 1 दिन का वक्त कम करते हुए संबंधित पार्टियों को बहस 17 अक्टूबर तक खत्म करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सुनवाई का दिन कम करते हुए सभी पक्षों से कहा कि उनकी अदालत से जो भी समाधान की उम्मीद है वह 17 तारीख तक अपने तर्कों के जरिए रख दें।

चीफ जस्टिस 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली संवैधानिक बेंच मामले की सुनवाई कर रही है और चीफ जस्टिस का कार्यकाल 17 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इससे पहले की की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामले की निर्बाध गति से सुनवाई चलती रहेगी और साथ में मध्यस्थता भी चल सकता है।

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4 हफ्ते के बाद फैसले का दिन निर्धारित

17 अक्टूबर तक सभी पक्षों की दलील अब समाप्त हो जाएगी। जिसके बाद जजों को 4 हफ्ते का वक्त मिलेगा ताकि जजमेंट लिखा जा सके। इससे पहले भी अधिक समय की मुस्लिम पक्ष की मांग पर चीफ जस्टिस ने कहा था, `हमें मिलकर प्रयास करना चाहिए कि सुनवाई 18 अक्टूबर तक खत्म हो जाए। जरूरत पड़ी तो हम एक घंटे रोजाना सुनवाई की अवधि बढ़ा सकते हैं। जरूरत पड़ी तो शनिवार को भी सुनवाई की जा सकती है।` हालांकि, अब सुनवाई की तारीख एक दिन कम कर दी गई है।

सभी पक्ष अपने तर्क और प्रमाण सुप्रीम कोर्ट में कर रहे हैं पेश

अयोध्या के भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट लगातार सुनवाई कर रहा है। हिंदू पक्षकारों ने 16 दिन में अपनी दलीलें रखीं और अब मुस्लिम पक्ष अपनी दलील पेश कर रहा है। मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने सोशल मीडिया पर मिली धमकियों का भी कोर्ट में जिक्र किया था जिसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि सभी पक्ष बिना किसी डर के अपने तर्क कोर्ट के समक्ष रखें।

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