उन्नाव रेप पीड़िता ने तोड़ा दम, पिता बोले- हैदराबाद एनकाउंटर की तरह आरोपियों को मार दो गोली

संक्षेप:

  • उन्नाव में रेप की शिकार युवती ने दिल्ली के सफजरजंग अस्पताल में तोड़ा दम.
  • रेप के बाद आरोपियों ने जिंदा जलाया था, पांचों आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार.
  • रेप पीड़िता के पिता की मांग- हैदराबाद गैंगरेप की तरह आरोपियों को हो सजा.

उन्नाव: दो दिन तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद उन्नाव रेप पीड़िता (Unnao Rape Victim) की शुक्रवार रात 11 बजकर 40 मिनट पर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल (Safdarjung Hospital) में मौत हो गई. बेटी की मौत से आहत बेबस पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जैसे हैदराबाद पुलिस ने एनकाउंटर में रेप के आरोपियों को दौड़ा कर गोली मारी थी. मेरी बेटी के दरिंदों को भी वैसी ही सजा मिलनी चाहिए. उन्होंने सरकार से उन्हें एनकाउंटर या फांसी की सजा देने की मांग की. पीड़ित पिता ने कहा कि मुझे धन का लालच नहीं है. मेरी सिर्फ एक ही मांग है कि मेरी बेटी को मौत के बाद इंसाफ मिले. जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह 10 बजे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में पीड़ित युवती का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा. जिसके बाद परिजन उसका शव लेकर उन्नाव आएंगे.

`मुझे जलाने वालों को छोड़ना मत`

हालांकि 90 प्रतिशत से भी ज्यादा जल चुकी यूपी की इस `निर्भया` ने आखिरी वक्त तक भी हार नहीं मानी थी. गुरुवार देर शाम लखनऊ से एयर लिफ्ट कर दिल्ली लाई गई पीड़िता रात नौ बजे तक होश में थी. अस्पताल में जब तक वो होश में रही, कहती रही- मैं बच तो जाऊंगी, मुझे जलाने वालों को छोड़ना मत. फिर वो बेहोश हो गई, डॉक्टरों ने उसे होश में लाने की पूरी कोशिश की, उसे वेंटिलेटर पर रखा लेकिन वो बच न सकी. न्याय की जंग लड़ते-लड़ते एक और निर्भया जिंदगी की जंग हार गई.

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डॉक्टरों ने कहा था- बचने के चांस हैं कम

सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. सुनील गुप्ता ने शुक्रवार सुबह 11 बजे बयान जारी कर कहा था कि पीड़िता के बचने के चांस बहुत कम हैं. उसकी बिगड़ती हालत को देखते हुए वेंटिलेटर पर रखा गया था. कहा जा रहा था कमर के नीचे के दो अंदरूनी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था.

संक्रमण रोकने की कोशिश लेकिन...

डॉक्टरों को सबसे ज्‍यादा डर संक्रमण फैलने का था. डर भी सही साबित हुआ, पीड़िता के शरीर में तेजी से संक्रमण फैला जिसे रोकना मुमकिन नहीं रहा. डॉक्टरों ने इस बात की जानकारी पहले ही दी थी कि यदि पीड़िता के शरीर में संक्रमण फैल गया तो फिर उसे कंट्रोल करना बहुत मुश्किल होगा. बताया जा रहा है कि बर्न केस में ज्यादातर मरीज की मौत संक्रमण फैलने के चलते हो जाती है.

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