क्या है ZERO बजट खेती? क्या मोदी सरकार के इस स्कीम से वाकई किसानों को मिलेगा फायदा?

संक्षेप:

  • बजट भाषण में निर्मला सीतरमण ने किसानों की आर्थिक हालत में सुधार के लिए कई कदम उठाए जाने का ऐलान किया.
  • जिसमें उन्होंने जीरो बजट खेती (Zero Budget Farming) के बारे में कहा.
  • जीरो बजट खेती का उद्देश्य किसानों को कर्ज के जाल से बाहर निकालना है.

लखनऊ: 5 जुलाई 2019 को नरेंद्र मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश किया. बजट भाषण में निर्मला सीतरमण ने किसानों की आर्थिक हालत में सुधार के लिए कई कदम उठाए जाने का ऐलान किया. जिसमें उन्होंने जीरो बजट खेती (Zero Budget Farming) के बारे में कहा. ऐसे में आइए जानते हैं क्या है जीरो बजट खेती और किसानों का कितना मिलेगा लाभ.

जीरो बजट खेती का लक्ष्य किसानों को कर्ज से मुक्त करना

सबसे पहले आपको बता दें, जीरो बजट खेती (Zero Budget Farming) में कीटनाशक, रासायनिक खाद और हाईब्रिड बीज जैसे किसी भी आधुनिक उपाय का इस्तेमाल नहीं होता है. इस तरह की खेती को पूरी तरह से प्राकृतिक संसाधनों के साथ किया जाता है. जीरो बजट खेती का उद्देश्य किसानों को कर्ज के जाल से बाहर निकालना है. जहां किसान खुद को फंसा हुआ पाते हैं. इसी के साथ यह छोटे पैमाने पर खेती को एक व्यवहार्य व्यवसाय बनाने का भी एक प्रयास है. बता दें, कई राज्यों में, महंगे बीज, और दुर्गम बाजारों के कारण कृषि लागत बढ़ने के कारण किसान भारी कर्ज में हैं. इस तरह की खेती करने से उन्हें फायदा मिलेगा.

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किसान अपने बनाए खाद और अन्य चीजों का इस्तेमाल करते हैं

जीरो बजट खेती से किसान अपने द्वारा बनाए गए खाद और अन्य चीजों का प्रयोग करते हैं. जिसमें किसी भी तरह की रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों को इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती है. वहीं जो भी फसल इस तकनीक से उगाई जाती है वह सेहत के लिए काफी लाभदायक होती है क्योंकि इसे उगाने के लिए के लिए किसी भी तरह के रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल नहीं किया जाता.

जीरो बजट खेती से किसानों को होगा ये लाभ

जीरो बजट खेती पूरी तरह से प्राकृतिक खेती है. जो भी किसान खेती करने में इस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं उन्हें किसी भी तरह के केमिकल पदार्थों की जरूरत नहीं पड़ती है.

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