योगी सरकार के दो साल दावे बड़े, लेकिन हकीकत कुछ और

संक्षेप:

  • यूपी सरकार के दावों को महसूस कराने में अभी आम जनता को वक़्त लगेगा
  • अलीगढ़ मामले में देखने को मिली पुलिस की लापरवाही
  • रोजगार को लेकर सरकार की सारी कोशिशें साबित  हो रही है नाकाफी

By: मदन मोहन शुक्ला

उ0प्र0 बीजेपी सरकार ने अभी हाल में दो साल पूरे किये । योगी आदित्यनाथ जी ने सरकार की उपलब्धियों की बौछार लगा दी मानो पिछली सरकारों ने कुछ किया ही न हो। लेकिन दावों के बावजूद ज़मीन पर आम लोगों को कुछ भी अंतर नज़र नहीं आ रहा है। चाहे बात रोजगार की हो ,भ्रष्टाचार  नियंत्रण, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवायों में किसी एक की भी हों। सरकार बार बार यह कहती है और दावा करती है कि हमने बहुत काम किया लेकिन आम जनता को महसूस कराने में अभी वक़्त लगेगा।

सरकार भ्रष्टाचार  को लेकर जीरो टोलरेंस की तो बात करती है लेकिन धरातल पर इसका असर कम है और सरकार की तरफ से इन दो सालों में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। फौरी तौर पर छुटपुट कार्रावई भर्ती घोटालों एवं पेपर लीक मामले  में ज़रूर हुई। सतर्कता अधिष्ठान,आर्थिक अपराध शाखा ,सी0बी0सी0आई0डी0,एंटी करप्शन ब्यूरो,एस0आई0टी0 सहित अन्य जाँच एजेंसी में करीब 400 मामले लंबित है, जिसमें विधायक, पूर्व मंत्री,पूर्व विधायक,नौकरशाह,आई पी एस,पी सी एस, पी पी एस के अलावा अन्य संबर्ग के अधिकारी है। लेकिन अभी तक कुछ मामलो में जाँच भी शुरू नहीं हुई है अलबत्ता सम्बंधित विभाग इनको बचाने में लगा है।

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मुख्यमंत्री दावा करते है सुरक्षा का बेहतर माहौल देने के कारण देश में प्रदेश की कानून व्यवस्था एक नज़ीर बनी है। हां नज़ीर बनी अलीगढ़ के टप्पल में दो साल की बच्ची के साथ जो हैवानियत हुई और पुलिस की जो संवेदनहीनता और घोर लापरवाही सामने आई, वह कहीं से भी माफी लायक नहीं है लेकिन सरकार केवल खानापूर्ति पांच दोषी पुलिस वालों को निलंबित करके कर रही है। यहाँ सवाल उठता है जब पीड़िता ने 30 की सुबह 8.30 बजे पुलिस से अपनी दो साल की बेटी की गुमशुदगी की बात बताई तो पुलिस ने 36 घंटे क्यों लगाये एफ आई आर लिखने में।
इसमें क्यों नहीं धारा 166(A) आई पी सी के तहत दोषी पुलिस कर्मियों की अभी तक गिरफ़्तारी हुई? दोषियों पर गैंगस्टर एक्ट भी रासुका, एन एस ए और पॉकसो एक्ट के अलावा लगना चाहिए इससे सम्पति कुर्क करने की शक्ति मिल जाती है लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ केवल एस आई टी ही बनाई गयी है।

यहीं नहीं अपराध थमता मासूमों के साथ दरिंदगी और हत्या निरंतर हो ही रही है, कुशीनगर में 12 साल की मासूम के साथ गैंग रेप माता-पिता के सामने,हमीरपुर में 10 साल की मासूम के साथ रेप एवं हत्या,मेरठ में 9 साल की मासूम के साथ रेप एवं गला घोंट के हत्या, झाँसी में 7 साल की मासूम के साथ रेप एवं हत्या।यह सारी घटनायें पिछले एक दो दिन में हुई है। तो यह योगी सरकार की नज़ीर पेश करने वाली कानून व्यस्था है।फ़र्ज़ी एनकाउंटर के लिए प्रसिद्ध यू पी पुलिस। जिसने अपनी संवेदनहीनता एवं क्रूरतम चेहरा दुनिया को दिखा दिया जिस पर हमारे योगी जी गर्व करते है। पूर्व में भी सरकार की कारगुजारियां सामने आती रही है।

2018 का उन्नाव बलात्कार कांड प्रदेशवासी  कैसे भूल सकते हैं जिसमें किस तरह वहाँ के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को स्थानीय पुलिस योगी सरकार की शह पर बचाती रही। आज तक बीजेपी हाई कमांड ने इस बलात्कारी विधयाक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। योगी सरकार दावा करती है सुरक्षा के इस माहौल में 5 लाख करोड़ रु तक निवेश का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। पिछले दो वर्ष के दौरान सरकार प्रदेश में 1.5 लाख करोड़ रु से ज्यादा का निवेश कराने में सफल रही है, जिससे 15 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिला। इसके साथ साथ पूरी पारदर्शिता बरतते हुए  2लाख 25 हज़ार युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दी गई। इतने बड़े पैमाने पर निवेश होने के बावजूद धरातल पर इतना निवेश दिख नहीं रहा है।

रोजगार को लेकर सरकार की सारी कोशिशें नाकाफी साबित हो रही है। ज्यादातर विभागों में नौकरी के लिए होने वाली परीक्षा संदेह के घेरे में आ जा रही हैं मामला कोर्ट में चला जा रहा है। अभी हाल में सरकारी संस्था नेशनल सर्वे सैंपल ऑफिस के पीरियाडिक लेबर फोर्स के एक सर्वे में उ0प्र0 का प्रयागराज शहर बेरोजगारी के मामले में 8.9% के साथ देश में अव्वल है, दूसरे नंबर पर मेरठ 8.5%, लखनऊ नौंवे नंबर पर, कानपुर छठे नंबर, ग़ाज़ियाबाद सातवें पायदान पर है। उ0प्र0 में जनवरी 2019 तक पंजीकृत 10 लाख बेरोजगार जिसमें 7.53 लाख प्रशिक्षित जिसमें केवल 25 फीसदी ही को रोजगार मिला है।

सरकार की ओर से वन डिस्ट्रिक वन प्रोजेक्ट  को लेकर दावा किया जा रहा है इससे रोजगार बढ़ा है। 5लाख लोगों को रोजगार मिला है। इस योजना में हर जिले के प्रमुख उद्योग को  चुनकर विकास किया गया इस दौरान सरकार ने इन उद्योगों में लगे 21लाख 84 हज़ार 513 कारोबारियों को 17 हज़ार 431 करोड़ रु0 की वित्तीय मदद दी गई।जिससे रोज़गार पैदा हुआ। हालांकि सरकार इस सन्दर्भ में कोई ठोस आंकड़ा नहीं दे पाई। किसानों की कर्ज माफ़ी के सन्दर्भ में मुख्यमंत्री का दावा की 36 हज़ार करोड़ के प्रावधान से लघु एवं सीमांत किसानों का औसतन 60 हज़ार रु प्रति किसान का क़र्ज़ माफ़ किया गया। इस योजना में सरकार ने 86 लाख किसानों  के क़र्ज़ माफ़ी की घोषणा की थी। लेकिन अभी तक 46लाख किसानों  की ही क़र्ज़ माफ़ी हुई है।

यहाँ सवाल उठता है कि क्या क़र्ज़ माफ़ी ही किसानों में  सुख समृद्धि लायेगी अगर ऐसा होता तो किसान आज भी आत्महत्या न करते जो निरंतर जारी है । कृषि नीतियों के जानकार देविंदर शर्मा का मानना है कि सरकार की आर्थिक नीतियों का नतीजा है कि किसान क़र्ज़ में डूबा हुआ है।सरकार ने किसानों को जानबूझकर कर गरीब रखा। कृषि को व्यवस्थित तौर पर आर्थिक रूप से आलाभपद्र बनाया। जिसके कारण किसान क़र्ज़ के दुष्चक्र  में फँस गया। हालात यह है कि पिछले दस सालों में कृषि ऋण 22 गुना बढ़ गया।

ऐसे ही बीजेपी सरकार का दावा सरकार ने इन दो सालों में  57 हज़ार 578 करोड़ का भुगतान 2010-12 से लेकर 2017-18 तक के गन्ना खरीद का किया तथा पिछली सरकार को कोसा जो काम उसे करना था वह हमने किया।लेकिन हकीकत यह है कि बीजेपी सरकार ने 14 दिन में भुगतान न होने पर ब्याज़ देने की बात की थी। ब्याज़ तो दूर की बात अभी भी प्रदेश में किसानों का करीब 10 हज़ार करोड़ से ज्यादा का गन्ना मूल्य बकाया है।

योगी सरकार का दावा पिछले दो सालों में कोई दंगा नहीं हुआ लेकिन फ़र्ज़ी एनकाउंटर तो हुए जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी ही तल्ख़ टिप्पणी भी की।उ0प्र0 पुलिस के कारनामों से योगी सरकार की किरकिरी भी हुई। इसमें चाहे सहारनपुर ,मेरठ,बुलंदशहर से लेकर कासगंज लखनऊ सहित अन्य जिलों में घटित घटना से प्रदेश सरकार के दावे अपराध मुक्त , मरीचिका ही साबित हुए। जेलों में घटित हत्याएं ,तमाम ऐसो-आराम के वीडियो वायरल हुए जिसने योगी सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। और तो और द वायर की एक रिपोर्ट कहती है कि अभी हाल में सी एम आदित्यनाथ ने अपने खिलाफ 15 आपराधिक मामले जिसमें हत्या,दंगा,लोगों को अपराध के लिए प्रेरित करना आदि-आदि, बंद करने का आदेश दिया। उत्तरप्रदेश क्रिमिनल लॉ(कम्पोजीशन ऑफ़ ऑफन्सेस एंड अबटेमेंट ऑफ़ ट्रायल्स (अमेंडमेंट एक्ट 2017)को कैबिनेट से पारित कराने के बाद योगी ने प्रदेश में करीब 20 हज़ार दर्ज मामलों की फाइल बंद करने का आदेश दिया जिसमें खुद के आपराधिक मामलों के साथ साथ उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की फाइल भी थी।

मुख्यमंत्री का दावा की हमारी स्वाथ्य सेवायों में काफी सुधार आया है। लेकिन प्रदेश की बढ़ती जनसंख्या और मरीजों की बढ़ती आमद एवं स्वास्थ्य सेवायों पर सिकुड़ता बजट,दर्शाता है कि सरकार के प्रयास कितने कारगर हैं। तभी तो आये दिन मरीजों के तीमारदारों और अस्पताल के स्टाफ से मारपीट से लेकर अभद्रता  की घटना सुगम चिकित्सा न मिलने से अक्सर हो जाया करती है। योगी सरकार के दो साल के कार्यकाल के मंथन एवं समीक्षा की जरूरत है । आंकड़ों की बाजीगरी की जगह संचालित योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना ही एक मात्र उद्देश्य होना चाहिये।

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