मथुरा: ये हालत है महिला फांसीघर की जहां शबनम को मिल सकती है फांसी

संक्षेप:

  • शबनम के डेथ वारंट की उल्टी गिनती शुरू हो
  • मथुरा जेल के महिला फांसीघर में तैयारी होने लगी
  • मथुरा जिला कारागार (जेल) लगभग 150 साल पुराना है

मथुरा । आज़ाद भारत में शबनम पहली महिला होंगी जिन्हें फांसी मिलेगी.एक तरफ जहां अमरोहा की जिला अदालत में शबनम-सलीम फांसी केस में डेथ वारंट की उल्टी गिनती शुरू हो गई है, वहीं दूसरी तरफ मथुरा जेल के महिला फांसीघर में भी तैयारी होने लगी है। यहां शबनम को फांसी दी जा सकती है। हालांकि इस संबंध में जेल प्रशासन को अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है, लेकिन बक्सर जेल से रस्सी का एस्टीमेट मांगा गया है।

आपको बता दें कि मथुरा जिला कारागार लगभग 150 साल पुराना है। यह वर्ष 1870 में बना था। उत्तर प्रदेश का एकमात्र महिला फांसीघर मथुरा जेल में ही है। जिसका उल्लेख जेल मैनुअल में है। अधिकारियों के मुताबिक अभी यह फांसीघर पूरी तरह से बना नहीं है। फांसीघर के नाम पर केवल एक छोटा सा निर्माण है। जिसमें अभी तक किसी भी महिला को फांसी ही नहीं दी गई।

जेल अधिकारियों के मुताबिक महिला फांसीघर में बहुत सी कमियां हैं। इसमें फांसी लगाने के लिए होने वाला लीवर (जिसे खींचने के बाद मुजरिम फंदे से लटक जाता है) और तख्ता आदि नहीं हैं। यहां तक कि सीढ़ियों की भी मरम्मत करानी पड़ेगी। मथुरा जेल के जेलर एमपी सिंह ने बताया कि अभी महिला फांसीघर अधूरा है। शबनम फांसी केस के संबंध में आधिकारिक रूप से उनके पास कोई सूचना नहीं है। हम केवल सामान्य साफ-सफाई करा रहे हैं।

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साथ ही,जेलर एमपी सिंह ने बताया कि शबनम मामले को लेकर मीडिया से सूचनाएं आने के बाद हमने बक्सर जेल से रस्से का एस्टीमेट मांगा है। इसके बाद हम उस पर विचार करेंगे कि रस्सा मंगाना है या नहीं। चूंकि रस्से को तैयार करने में समय लगता है इसलिए हमें इसकी तैयारी पहले से करनी पड़ेगी।

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