श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण: ईदगाह को हटाए जाने पर कोर्ट में छिड़ी ये बहस, 30 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

संक्षेप:

  • इस केस पर उपासना अधिनियम 1991 लागू ही नहीं होता: रिट अधिवक्ता
  • सुन्नी वक्फ बोर्ड को फिर नोटिस
  • 30 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

मथुरा। श्री कृष्ण जन्मस्थान से ईदगाह को हटाए जाने को लेकर सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में हुई सुनवाई में शुक्रवार को इंतजामिया कमेटी शाही मस्जिद ईदगाह की ओर से अपना जवाब दाखिल किया गया। जिसमें कहा गया कि उपासना अधिनियम 1991 के तहत यह केस चलाया ही नहीं जा सकता। वहीं रिट दायर करने वाले अधिवक्ता एमपी सिंह ने कहा कि इस केस पर उपासना अधिनियम 1991 लागू ही नहीं होता।

शाही मस्जिद ईदगाह के सचिव एडवोकेट तनवीर अहमद ने अदालत में दर्ज दावे का विरोध करते हुए कहा कि चूंकि इस दावे पर उपासना स्थल अधिनियम 1991 लागू होता है, इसलिए दावा सुने जाने योग्य नहीं है। इसके विरोध में वादी अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह के अधिवक्ता राजेंद्र माहेश्वरी ने अदालत को बताया कि यह स्थान पूर्व से ही विवादित है, इस संबंध में अदालत में केस भी दर्ज हुए हैं। इसलिए यहां पर उपासना स्थल अधिनियम लागू नहीं होता। वादी पक्ष ने अधिवक्ता सुब्रमण्यम स्वामी और अश्वनी कुमार उपाध्याय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई रिट की प्रति अदालत को दीं। साथ ही अदालत को बनारस की सिविल कोर्ट का वह आदेश भी दिखाया, जिसमें उसने उपासना स्थल अधिनियम को न मानकर ज्ञानव्यापी मस्जिद की खुदाई के आदेश किए हैं। 

सुन्नी वक्फ बोर्ड को फिर नोटिस

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अदालत ने दावे के चौथे प्रतिवादी अध्यक्ष सुन्नी वक्फ बोर्ड को दोबारा नोटिस जारी किया है। वह अभी तक अदालत में हाजिर नहीं हो सके हैं। वादी पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि अब अदालत में सुनवाई 30 जुलाई को होगी। प्रतिवादी पक्ष सचिव शाही ईदगाह मस्जिद अधिवक्ता तनवीर अहमद ने बताया कि वह 30 जुलाई को अदालत में दावाकर्ता की दलीलों के खिलाफ पक्ष रखेंगे। 

क्या है उपासना स्थल अधिनियम

1.उपासना स्थल अधिनियम स्वतंत्रता के समय मौजूद धार्मिक स्थलों के बदलने पर रोक लगाता है।  

2.यह अधिनियम 1992 बाबरी विध्वंस से एक वर्ष पूर्व पारित किया गया था।

3.इस अधिनियम की धारा तीन के तहत किसी पूजा के स्थान या उसके एक खंड को अलग धार्मिक संप्रदाय की पूजा के स्थल में बदलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

4.यह अधिनियम उन सभी पूजा स्थल पर लागू नहीं होता है जो एक प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक हो अथवा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 द्वारा संरक्षित एक पुरातात्विक स्थल है।

5.अधिनियम की धारा 6 में अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ अधिकतम तीन वर्ष की कैद का प्रावधान है।

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