मुजफ्फरनगरः हिंसा में युवक की मौत, परिजनों ने मांगा मुआवजा और नौकरी

संक्षेप:

  • भारत बंद के दौरान हुई हिंसा में युवक की मौत
  • गांव गादला में किया गया अंतिम संस्कार
  • परिनजनों ने की मुआवजा और नौकरी की मांग

मुजफ्फरनगरः सोमवार को एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरोध में बुलाए गए भारत बंद के दौरान हुई हिंसा में पुलिस के 25 से 30 जवान घायल हुए हैं वहीं पथराव से सैंकड़ों लोग भी घायल हुए हैं। हिंसक भीड़ द्वारा की गई फायरिंग में एक युवक की भी मौत हो गई।  मृतक युवक प्रदर्शनकारियों में शामिल था।

बताया जाता है कि आगजनी और पथराव के दौरान मृतक भी नई मंडी कोतवाली के पास मौजूद था। यहां भीड़ में से फायरिंग की गई। इसके बाद आगजनी भी हुई। इसी फायरिंग में युवक की मौत हो गई। मृतक के शव को रात में ही पंचनामा भर पोस्टमार्टम कराया गया और सुबह उसके गांव गादला में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं परिजनों का दावा है कि युवक की मौत पुलिस की गोली से हुई है। उन्होंने बताया कि युवक अमरेश ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए पुलिस की गोली से अमरेश नई मंडी पर खड़ा था, तभी पुलिस की ओर से चलाई गई गोली उसे लग गई।

परिजनों ने सरकार से 10 लाख रुपये मुआवजा व एक सरकारी नौकरी की मांग की। हिंसक भीड़ द्वारा की गई आगजनी, तोड़फोड़, पथराव और फायरिंग में अमरेश पुत्र सुरेश निवासी गादला थाना भोपा की गोली लगने से मौत हो गई थी। उसकी मौत को लेकर दलित समाज में रोष है। मृतक अमरेश मजदूरी करता था।

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परिजनों के अनुसार सोमवार की सुबह वह घर से मजदूरी पर जाने के लिए निकला था। करीब 2.00 बजे उसके परिजनों को सूचना मिली कि अमरेश को गोली लग गई है। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बाद में उसकी हालत बिगड़ती गई और शाम को उसकी मौत हो गई। गांव गादला में भारी फोर्स की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर एडीएम प्रशासन हरिश्चंद्र, एसपी देहात अजय सहदेव, सीओ जानसठ गजल भारद्वाज, सीओ भोपा रिजवान अहमद समेत भारी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद थे।

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