डॉन मुन्ना बजरंगी ने महज 17 साल की उम्र में किया था पहला कत्ल

संक्षेप:

  • माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या
  • मुन्ना बजरंगी की आज बागपत कोर्ट में पेशी होनी थी
  • मुन्ना बजरंगी को हथियार रखना काफी पसंद था

बागपत जिला जेल पूर्वांचल के माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। 50 साल के मुन्ना को झांसी से बागपत जेल लाया गया था। जहां से उसकी सोमवार को बसपा के पूर्व विधायक से रंगदारी वसूली के मामले में पेशी थी। इस दौरान सुबह पांच से छह बजे के बीच जेल में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुन्ना की हत्या में बागपत जेल में ही बंद कुख्यात बदमाश सुनील राठी का नाम सामने आ रहा है। लंबे समय से हत्या, अपहरण, रंगदारी जैसे मामलों में संलिप्त रहे मुन्ना बजरंगी का आतंक था।

मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है। उसका जन्म 1967 में यूपी के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था। उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाना चाहते थे, लेकिन मुन्ना का मन पढ़ने-लिखने में नहीं लगता था। उसने सिर्फ पांचवी कक्षा तक पढ़ाई की। फिर पारिवारिक स्थिति खराब होने पर गांव के ईंट-भट्ठे पर रोजी-रोटी के लिए काम करने लगा। मुन्ना बजरंगी को बचपन से असलहों का शौक लगा। फिल्मे देख वह गैंगस्टर बनना चाहता थाय़

गांव में ही मारपीट के एक मामले में जब पुलिस ने छापा मारा तो मुन्ना बजरंगी के पास से अवैध असलहा बरामद हुआ। 17 साल की उम्र में पहली बार जौनपुर के सुरेरी थाना क्षेत्र में उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ। इसके बाद मुन्ना ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक अपराध की घटनाओं से उसका नाता जुड़ता चला गया। साल 1984 में पहली बार मुन्ना के हाथों किसी का कत्ल हुआ। उसने पहली बार एक व्यापारी की हत्या की थी। फिर मुन्ना ने जौनपुर के ही एक बीजेपी नेता रामचंद्र सिंह की हत्या कर पूरे जिले में अपना खौफ कायम किया।

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बताया जाता है कि मुन्ना बजरंगी का पहला संरक्षणदाता जौनपुर निवासी दबंग नेता गजराज सिंह था। उसके इशारे पर ही बीजेपी नेता रामचंद्र की मुन्ना ने हत्या की थी। जब हत्या की कई घटनाओं से जौनपुर में मुन्ना बजरंगी ने खलबली मचाई तो पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी की नजर पड़ी। मुख्तार ने उसे अपनी गैंग में शामिल कर लिया। 1996 में सपा के टिकट पर विधायक बनने के बाद मुख्तार की ताकत काफी बढ़ गई। जिस पर मुख्तार के इशारे पर मुन्ना सभी सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा। ठेकों से मुख्तार गैंग को काफी कमाई मुन्ना करवाने लगा।

साल 1995 में एक बार मुन्ना एसटीएफ के चंगुल में फंसा मगर मुठभेड़ से बच कर भाग निकला। यूपी में खुद को सुरक्षित न पाकर बाद में मुंबई को उसने ठिकाना बनाकर अपराध जारी रखा।  29 नवंबर 2005 को गाजीपुर के मोहम्मदाबाद सीट से बीजेपी के बाहुबली विधायक कृष्णनंद राय की हत्या हुई थी। आरोप के मुताबिक एके-47 से तब मुन्ना बजरंगी और उसके साथियों ने कृष्णानंद के काफिले पर करीब चार सौ राउंड गोलियां चलाईं थीं। जिससे विधायक सहित उनके छह सहयोगी मारे गए थे। जब पोस्टमार्टम हुआ था, तब हर किसी के शरीर से पचास से लेकर सौ गोलियां निकलीं थीं।

बीजेपी विधायक की हत्या में नाम सामने आने के बाद मुन्ना बजरंगी को एनकाउंटर का खौफ सताता रहा। ऐसा कहा जाता है कि इससे बचने के लिए उसने खुद यूपी की बजाए दिल्ली पुलिस के सामने सरेंडर की शर्त रखी। उस वक्त दिल्ली पुलिस को भी एक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की हत्या में उसकी तलाश थी। मुंबई में उसने 2009 में पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। उसे नाटकीय ढंग से पुलिस ने गिरफ्तारी दिखाई। जिसके बाद उसे यूपी पुलिस ने कस्टडी में लिया, तब से कई जेलों में रहने के दौरान वह अलग-अलग मुकदमों में अदालतों में पेश होता रहा।

अक्सर पेशी के दौरान मुन्ना बजरंगी सफेद कपड़े पहने हुए दिखता था। अपराध की दुनिया में लंबा वक्त बिताने के बाद उसे राजनीति में उतरने का चस्का लगा था। रंगदारी से करोड़ों रुपये वसूलने के बाद मुन्ना बजरंगी ने 2012 में मड़ियाहूं विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा मगर करारी हार हुई। इसके बाद पिछले विधानसभा चुनाव में उसने अपनी पत्नी सीमा को भी मैदान में उतारा था। मगर पत्नी को भी हार का सामना करना पड़ा। बताया जाता है कि मुन्ना बजरंगी करीब 40 से अधिक हत्या की घटनाओं में शामिल रहा।

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