17 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ बन गया ‘माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी’

संक्षेप:

  • माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या
  • मुन्ना बजरंगी की आज बागपत कोर्ट में पेशी होनी थी
  • मुन्ना बजरंगी को हथियार रखना काफी पसंद था

बागपत: बागपत जेल में कुख्यात माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुन्ना बजरंगी की आज बागपत कोर्ट में पेशी होनी थी। मुन्ना बजरंगी पर पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने का मुकदमा चल रहा था। इसी कारण उसे रविवार को झांसी से बागपत लाया गया था। इसी दौरान जेल में उसकी हत्या कर दी गई। यूपी के मुख्य्मंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

कौन है माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी ?

मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है। उसका जन्म 1967 में यूपी के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था। उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाना चाहते थे लेकिन उनके पिता का ये सपना पूरा नहीं हो सका। उसने 5वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी। किशोर अवस्था में जुर्म की दुनिया में पहुंच गया। मुन्ना बजरंगी को हथियार रखना काफी पसंद था। वह फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था। यही वजह थी कि वह 17 साल की उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।

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उस पर जौनपुर के सुरेही थाना में मारपीट मामले और अवैध असलहा रखने के लिए पुलिस ने मामला दर्ज किया गया था। मुन्ना बजरंगी जब अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बनाने में लगा था उस वक्त उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह का संरक्षण मिल गया। इस बाद बजरंगी उसके लिए काम करने लगा था। इसी दौरान मुन्ना ने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या कर दी थी।

पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना ने एक के बाद एक कई लोगों की हत्या की। मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया। मुख्तार अंसारी ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद यह गैंग बहुत मजबूत हो गया। मुन्ना सीधे ही सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था, वह लगातार मुख्तार अंसारी के निर्देशन में काम कर रहा था।

मुख्तार अंसारी  से कहने पर मुन्ना बजरंगी ने बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या की साजिश रची। मुन्ना बजरंगी ने 29 नवंबर 2005 को माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के कहने पर कृष्णानंद राय की दिन दहाड़े हत्या कर दी थी। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लखनऊ हाइवे पर कृष्णानंद राय की दो गाड़ियों पर AK 47 से 400 गोलियां चलाईं थी। इस हमले में गाजीपुर से विधायक कृष्णानंद राय के अलावा उनके साथ चल रहे 6 अन्य लोग भी मारे गए थे।

एक बार मुन्ना बजरंगी ने लोकसभा चुनाव में गाजीपुर लोकसभा सीट पर अपना एक डमी उम्मीदवार खड़ा करने का प्रयास किया। मुन्ना बजरंगी एक महिला को गाजीपुर से बीजेपी का टिकट दिलवाने की कोशिश कर रहा था। जिसकी वजह से उसके मुख्तार अंसारी के साथ संबंध भी खराब हो रहे थे। आपको बता दें कि मुन्ना बरजरंगी पर 40 हत्याओं, लूट, रंगदारी की घटनाओं में शामिल होने के मुकदमे दर्ज थे। मुन्ना उत्तर प्रदेश की पुलिस और एसटीएफ के लिए सिरदर्द बना हुआ था। वह लखनऊ, कानपुर और मुंबई में क्राइम करता था। सरकारी ठेकेदारों से रंगदारी और हफ्ता वसूलना का भी उस पर आरोप था।

मीडियो रिपोर्ट के मुताबिक मुन्ना बजरंगी की हत्या का आरोप बागपत जेल में बंद माफिया सुनील राठी पर लग रहा है। डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में एडीजी जेल ने बागपत जेल के जेलर, डिप्टी जेलर, जेल वॉर्डन और दो सुरक्षाकर्मियों को निलंबित कर दिया है।

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