मुरादाबाद: कोरोना महामारी इस साल भी हज यात्रा की राह में बना रोड़ा, जिले से 200 लोगों ने किया था आवेदन

संक्षेप:

  • दूसरे साल भी विदेशी यात्रियों की हजयात्रा पर प्रतिबंध जारी 
  • करीब 65 हजार भारतीयों की हजयात्रा की ख्वाहिश अधूरी रह गई
  • जिले से दो सौ लोगों ने हजयात्रा के लिए आवेदन किया था

मुरादाबाद। वैश्विक महामारी के कारण हज यात्रा की राह में रुकावटें बनी हुई है। खाना-ए-काबा की जियारत करना हर मुसलमान की ख्वाहिश होती है। लेकिन कोरोना महामारी इस साल भी हजयात्रा की राह में रोड़ा बन गई। सऊदी अरब हुकूमत ने दूसरे साल भी विदेशी यात्रियों की हजयात्रा पर प्रतिबंध जारी रखा है। इससे आवेदन करने वाले करीब 65 हजार भारतीयों की हजयात्रा की ख्वाहिश अधूरी रह गई। अब उन्हें फिर अगले साल का इंतजार करना होगा। जिले से दो सौ लोगों ने हजयात्रा के लिए आवेदन किया था।

लाटरी के जरिए लोगों के नाम तय किए जाते हैं

हज के लिए हर साल आवेदन किए जाते हैं, लेकिन हर किसी को हजयात्रा का मौका नहीं मिलता है। आवेदकों की संख्या अधिक होने पर लाटरी के जरिए लोगों के नाम तय किए जाते हैं। वर्ष 2020 में हज कमेटी इंडिया को 1.25 लाख का कोटा मिला था। इसकी तुलना में इस बार महज 65 हजार लोगों ने ही आवेदन किया था। 

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मुरादाबाद से 200 लोगों ने आवेदन किया 

हजयात्रा के लिए यूपी से 2900 और मुरादाबाद से 200 लोगों ने ही आवेदन किया था। ऐसे में हर किसी को हजयात्रा पर जाने का मौका मिल जाता, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते सऊदी हुकूमत ने पिछले साल की तरह इस बार भी विदेशी यात्रियों की हजयात्रा पर पाबंदी जारी रखी है। इसके चलते देशभर से आवेदन करने वाले 65 हजार लोग हजयात्रा पर नहीं जा सकेंगे। हजयात्रा के लिए वर्ष 2022 का इंतजार करना होगा। वर्ष 2020 में पाबंदी के चलते हिंदुस्तान से करीब सवा लाख लोग हजयात्रा पर नहीं जा सके थे।

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