मुरादाबाद: अखिल भारतीय हिंदू महासभा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, दिनेश चंद्र त्यागी का हुआ निधन, आरएसएस और भाजपा में उठी शोक की लहर

संक्षेप:

  • अखिल भारतीय हिंदू महासभा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, दिनेश चंद्र त्यागी का हुआ निधन
  • 24 जुलाई को मोक्षधाम पर होगा अंतिम संस्कार
  • राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता रहे

मुरादाबाद। शुक्रवार को मेरठ के अस्पताल में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और आरएसएस के प्रचारक रहे दिनेश चंद्र त्यागी का निधन हो गया। वह करीब 78 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से आरएसएस, भाजपा और अन्य संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई। 

दिनेश त्यागी के भतीजे सिद्धार्थ बताते हैं, उन्हें किडनी की दिक्कत थी। 30 जून को तबियत बिगड़ने पर उन्हें एशियन विवेकांनद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। थोड़ा आराम होने पर वह अस्पताल से लौट आए थे। 17 जुलाई को उन्हें फिर से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तबियत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें 22 जुलाई को मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया था। जहां शुक्रवार को दोपहर 3:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

24 जुलाई को मोक्षधाम पर होगा अंतिम संस्कार

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RSS के पर्यावरण नगर प्रमुख विपिन गुप्ता ने बताया कि 24 जुलाई को सुबह 10 बजे मोक्षधाम पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन की खबर सुनते ही RSS और भाजपा में शोक की लहर है। दिनेश चंद्र त्यागी तमाम सामाजिक कार्यों से जड़े थे। इसलिए समाज के तमाम लोग उनके अंतिम दर्शनों को पहुंच रहे हैं।

राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता रहे

दिनेश चंद्र त्यागी मूलरूप से अमरोहा के पेलीतगा गांव के निवासी थे। त्यागी स्वयंसेवक संघ के निष्ठावान कार्यकर्ता और विभाग प्रचारक रहे। राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता रहे। 1984 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा। बहुत कम अंतर से उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। अखिल भारतीय हिंदू महासभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने हिंदू महासभा को चुनाव आयोग से मान्यता दिलवाई, जिसके बाद कई सीटों पर हिंदू महासभा ने अपने प्रत्याशी उतारे। 

शिक्षा के प्रचार-प्रसार और विद्यालयों की स्थापना के लिए जीवन भर किया कार्य

1980 में उन्होंने मुरादाबाद के सिविल लाइंस में पं. शंभूनाथ सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की। वर्तमान में वह इस विद्यालय के संरक्षक-निदेशक थे। गांवों में उन्होंने शिक्षा के प्रचार-प्रसार और विद्यालयों की स्थापना के लिए जीवन भर कार्य किया। 

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