टोक्यो ओलंपिक 2021: मुरादाबाद से दीपेंद्र करेंगे टोक्यो पैरा ओलंपिक में प्रतिभाग

संक्षेप:

  • दीपेंद्र करेंगे टोक्यो पैरा ओलंपिक में प्रतिभाग
  • दस हजार रुपये महीना किराए पर पंजाब से आती थी पिस्टल
  • लाइसेंस के लिए पिछले ढाई साल से लगा रहे हैंं दफ्तरों के चक्कर 

मुरादाबाद। असमोली ब्लॉक के गांव भटपुरा निवासी दीपेंद्र सिंह किसान परिवार से है। दस मीटर पिस्टल में क्वालीफाई कर उन्होंने पैरा ओलंपिक का टिकट हासिल कर लिया। 

मुरादाबाद मंडल से पहले खिलाड़ी जो टोक्यो पैरा ओलंपिक में प्रतिभाग करेंगे

टोक्यों में शुरू होने वाले ओलंपिक के बाद पैरा ओलंपिक का आयोजन किया जाएगा। 15 अगस्त के बाद दीपेंद्र टोक्यों के लिए रवाना होंगे। वह मुरादाबाद मंडल से पैरा ओलंपिक में प्रतिभाग करने वाले पहले खिलाड़ी है जो टोक्यो पैरा ओलंपिक में प्रतिभाग करेंगे।

ये भी पढ़े : भारत-श्रीलंका टी-20 सीरीज का आखिरी और निर्णायक मुकाबला आज, इस प्लेयिंग XI के साथ उतर सकती है दोनों टीम


पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ओलंपिक के लिए इन तीन खिलाड़ियों को मिला टिकट

पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पैरा ओलंपिक के लिए तीन खिलाड़ियों ने टिकट कटाया है जिसमें नोएडा के गोविंदगढ़ निवासी पैरा एथलीट प्रवीण कुमार, मेरठ के महपा गांव निवासी विवेक ने पैरा तीरंदाजी में और संभल के दीपेंद्र ने पैरा निशानेबाजी में अपना स्थान बनाया है। 

दस हजार रुपये महीना किराए पर पंजाब से आती थी पिस्टल

दीपेंद्र ने बताया कि वह सन 2014 से बड़ौत में वीर सायमल रायफल शूटिंग रेंज में अभ्यास करते थे। वह किराये की पिस्टल से दस मीटर निशानेबाजी की प्रैटिक्स करते थे। दस हजार रुपये महीना किराए पर पंजाब से पिस्टल आती थी। उससे वह अभ्यास करते थे। जब कभी पिस्टल नहीं आती थी तो दूसरे साथियों की पिस्टल खाली होने पर निशानेबाजी की तैयारी करते थे। अब फिलहाल वह दिल्ली की एक शूटिंग रेंज में तैयारी कर रहे हैं। 

लाइसेंस के लिए पिछले ढाई साल से लगा रहे हैंं दफ्तरों के चक्कर 

उन्होंने बताया कि वह अपनी पिस्टल का लाइसेंस बनवाने के लिए पिछले ढाई साल से दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। ढाई साल पहले पिस्टल के लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। अब उस फाइल का पता ही नहीं है की वह प्रक्रिया में है भी या नहीं। अगर पिस्टल का लाइसेंस मिल जाता तो वह दस मीटर नहीं, बल्कि 20 और 25 मीटर वर्ग के लिए प्रयास करते। लेकिन उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों की अनेदखी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.