घर में खजाना दबा होने झांसा देकर ठगे 1.30 लाख रुपये

संक्षेप:

  • मुजफ्फरनगर में हुई ठगी की घटना
  • तांत्रिक ने ठगे 1.5 लाख रुपये
  • घर में खजाने का रचा ढ़ोग

मुजफ्फरनगर- मुजफ्फरनगर के जानसठ थाना क्षेत्र में तथाकथित तांत्रिक ने मकान में करोड़ों रुपये का खजाना दबा होने का लालच देकर तंत्रमंत्र विद्या दिखाकर 1.30 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित ने तहरीर देकर कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

मोहल्ला हुसैनपुरा निवासी रईस ने देकर बताया कि कि वह दर्जी है। जनवरी में उसकी दुकान के बराबर में चाय की दुकान पर जिला मेरठ के थाना सरधना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति चाय पीने के लिए आया था।

उस व्यक्ति ने बताया कि वह एक आलिम है और उसे जादू टोना उतार-चढ़ाव में किसी प्रकार की परेशानी को दूर करने का महारत हासिल है। रईस के मकान में उसकी बेटी काफी दिनों से बीमार चल रही थी। रईस ने तांत्रिक से अपनी पुत्री का इलाज करने के लिए कहा।

ये भी पढ़े : सावधान! संक्रमण से मरने वालों की संख्या में उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में पहले स्थान पर, पढ़िए पूरी खबर


तथाकथित तांत्रिक रईस के घर पहुंचा और उसने बताया कि उसके मकान में करोड़ों रुपये का खजाना दबा हुआ है। वह उस खजाने को निकाल सकता है, लेकिन इसके बदले उसे एक लाख तीस हजार रुपये देने होंगे। पीड़ित तथाकथित तांत्रिक के झांसे में आ गया। उसने तांत्रिक को एक लाख तीस हजार रुपये दे दिए।

11 मार्च 2021 को तांत्रिक ने रईस के मकान में तंत्र मंत्र विद्या की, लेकिन कोई खजाना नहीं निकला। इसके बाद तांत्रिक अपने गांव चला गया। रईस तांत्रिक को तलाश करते हुए उसके गांव में पहुंचा, जहां पर पता चला कि आरोपी कोई तांत्रिक नहीं है। वह लोगों को ठगने का काम करता है।  

रईस ने बताया कि तथाकथित तांत्रिक गांव भलेड़ी निवासी राकेश से दस हजार रुपये, गांव सादपुर निवासी मास्टर बालमुकुंद से 15 हजार रुपये इसी प्रकार घरेलू परेशानी व बीमारी दूर करने की बात करके ठगकर ले गया। पीड़ित ने पुलिस को तहरीर देकर तथाकथित तांत्रिक के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने की गुहार लगाई है। पुलिस ने तहरीर लेकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।

If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Related Articles