समस्या: कोरोना के आरटी-पीसीआर टेस्ट में निगेटिव आने के बाद भी लोग हो रहे है कोरोना संक्रमित

संक्षेप:

  • आरटी-पीसीआर टेस्ट रिजल्ट पर उठ रहे है सवाल
  • 30 प्रतिशत फॉल्स निगेटीव रिपोर्ट दे रहा है यह टेस्ट
  • सीटी स्कैन से उजागर हुआ आरटी-पीसीआर फॉल्स रिपोर्ट का मामल

मुजफ्फरनगर- क्या रैपिड एंटीजन टेस्ट और आरटी-पीसीआर टेस्ट में निगेटिव मिलने के बाद भी आप कोविड-19 पॉजिटिव हो सकते हैं? देश के विभिन्न शहरों में ऐसे मरीज आ भी रहे हैं, जिनमें यह रिपोर्ट निगेटिव हैं, लेकिन हालत गंभीर होने की वजह से उनका हाई रेजोल्यूशन सीटी (एचआरसीटी) किया जा रहा है। इसमें फेफड़ों में कोरोना के गंभीर संक्रमण की पुष्टि हो रही है।

नए स्ट्रेन के मरीजों में एचआरसीटी व लैब की बाकी जांच वायरस की पुष्टि कर सकते हैं। जब तक कोई और बीमारी न पता चले, कोविड के दावे को माना जाए। देश के कई शहरों में डॉक्टर इस प्रकार के मामले आने की पुष्टि कर रहे हैं और रेडियोलॉजिकल जांच में पुष्टि होने पर मरीजों को कोविड-19 का इलाज दे रहे हैं।

कोरोना से ठीक होने वाले हर तीसरे इंसान को लंबे समय तक दिमागी और स्नायुतंत्र से जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें ज्यादातर लोग घबराहट और अवसाद के शिकार हो रहे हैं।

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यह खुलासा एक शोध में हुआ है, जिसमें दो लाख से ज्यादा लोगों के स्वास्थ्य पर नजर रखी गई थी। लैंसेट साइकिएट्री में छपे अध्ययन के मुताबिक, संक्रमण के छह महीनों में 34 फीसदी लोगों ने मनोवैज्ञानिक या स्नायुतंत्र से जुड़ी बीमारियों का इलाज कराया है।

संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में आठ महीने बाद 10 में से किसी एक व्यक्ति में दोबारा कोरोना के गंभीर लक्षण मिल रहे हैं। यह खुलासा वैज्ञानिकों ने एक चिकित्सीय अध्ययन में किया है। इसका सीधा निगेटिव असर लोगों के सामाजिक और निजी जीवन पर पड़ रहा है।

डॉक्टरों को आशंका है कि वायरस अपनी पैथोजेनेसिटी (मेजबान को क्षतिग्रस्त करने की क्षमता) बदल रहा है। इससे कुछ मामलों में फेफड़े पहले चरण में ही संक्रमित हो रहे हैं। फेफड़े में संक्रमण पहुंचने का मतलब है रोग बढ़ चुका है। इसकी पहचान सीटी स्कैन में हो सकती है।
परिणाम में अब डॉक्टर केवल आरटी-पीसीआर रिपोर्ट पर भरोसा नहीं कर रहे। उनके अनुसार यह निगेटिव मिल रही है, लेकिन मरीज के सीने के सीटी स्कैन में संक्रमण मिल रहा है।
 

विशेषज्ञों के अनुसार आरटी-पीसीआर में 30 प्रतिशत मामले फॉल्स निगेटिव, यानी संक्रमण होते हुए भी निगेटिव रिपोर्ट मिलने के हो सकते हैं। इसकी वजह इस टेस्ट का 70 प्रतिशत सफल होना बताया जा रहा है।

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