पहलू खान मामले पर ट्वीट कर फंसी प्रियंका गांधी, आपराधिक मामला दर्ज

संक्षेप:

  • कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है.
  • बिहार के मुजफ्फरपुर सीजेएम कोर्ट में वकील सुधीर ओझा की ओर से यह केस दर्ज कराया गया है.
  • प्रियंका गांधी के खिलाफ धार्मिक उन्माद फैलाने और लोअर कोर्ट के फैसले का अवमानना करने के आरोप में परिवाद पत्र दर्ज कराया है.

जयपुर: कांग्रेस कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है. बिहार के मुजफ्फरपुर सीजेएम कोर्ट में वकील सुधीर ओझा की ओर से यह केस दर्ज कराया गया है. सुधीर ओझा ने सीजेएम सूर्यकांत तिवारी के कोर्ट में प्रियंका गांधी के खिलाफ धार्मिक उन्माद फैलाने और लोअर कोर्ट के फैसले का अवमानना करने के आरोप में परिवाद पत्र दर्ज कराया है. सीजेएम सूर्यकांत तिवारी के कोर्ट ने सुधीर ओझा के परिवाद पत्र को स्वीकार कर लिया है और इस मामले पर अगली सुनवाई अब 26 अगस्त को होगी. सुधीर ओझा ने प्रियंका गांधी के खिलाफ धारा 504, 506 और 153 के तहत केस दर्ज कराया है. दरअसल, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शुक्रवार को कहा कि पहलू खान मॉब लिंचिंग मामले में लोअर कोर्ट का फैसला चौंका देने वाला है.

उन्होंने साथ ही कहा कि हमारे देश में अमानवीयता की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और राजस्थान सरकार का मॉब लिंचिंग पर कानून बनाने का फैसला स्वागत योग्य है. प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर कहा, पहलू खान मामले में लोअर कोर्ट का फैसला चौंकने वाला है. हमारे देश में अमानवीयता की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और भीड़ द्वारा हत्या एक जघन्य अपराध है.

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प्रियंका गांधी ने कहा, राजस्थान सरकार ने भीड़ द्वारा हत्या के खिलाफ कानून बनाने की पहल सराहनीय है. आशा है कि पहलू खान मामले में न्याय दिलाकर इसका अच्छा उदाहरण पेश किया जाएगा. बता दें कि पिकअप वैन से राजस्थान से हरियाणा मवेशी ले जाने के दौरान भीड़ ने गौ तस्करी के संदेह में पहलू खान की पिटाई की, जिसकी वजह से उनकी सरकारी अस्पताल में 3 अप्रैल 2017 को मौत हो गई थी. अलवर में लोअर कोर्ट द्वारा पहलू खान मामले में सभी छह आरोपियों को बरी किए जाने के दो दिन बाद प्रियंका ने यह कहा है.

गौरतलब है कि भीड़ द्वारा पहलू खान को पीट-पीटकर मार दिए जाने के करीब दो साल बाद अलवर सेशन कोर्ट ने बुधवार को मामले में सभी 6 आरोपियों को बरी कर दिया था. कोर्ट ने इन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया. अलवर के अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश नंबर-1, डॉ. सरिता स्वामी की अदालत में फैसला सुनाया गया.

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