बिहार में चमकी बुखार का कहर, 48 बच्चों की मौत, कम पड़ रहे हैं ICU

संक्षेप:

  • बिहार में चमकी बुखार यानी एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रॉम (AES) का कहर लगातार जारी है. 
  • पिछले 24 घंटे में 10 और बच्चों ने दम तोड़ दिया है तो वहीं 23 नए बच्चों को भर्ती कराया गया है.
  • तत्काल 60 बच्चे दोनों अस्पतालों में भर्ती हैं.

मुजफ्फरपुर: बिहार में चमकी बुखार यानी एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रॉम (AES) का कहर लगातार जारी है और इस बीमारी से होने वाली मौत का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है. पिछले 24 घंटे में 10 और बच्चों ने दम तोड़ दिया है तो वहीं 23 नए बच्चों को भर्ती कराया गया है. मरने वाले दस बच्चों में से सात की मौत एसकेएमसीएच में जबकि तीन की मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई है. इस बीच नये बीमार बच्चों को इन दोनो अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. तत्काल 60 बच्चे दोनों अस्पतालों में भर्ती हैं. एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर सहनी नें बताया कि बीमार बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी की वजह से दो नए पीआईसीयू खोले गए हैं. वैसे कई बच्चे ठीक होकर घर भी लौट रहे हैं.

मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है

बच्चों की मौत का आंकड़ा अब 48 तक जा पहुंचा है वहीं 60 बच्चों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. मरने वाले दस बच्चों में से सात की मौत एसकेएमसीएच में जबकि तीन की मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई है. अस्पताल से अब तक 22 बच्चों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है. इससे पहले रविवार की रात से सोमवार देर रात तक 20 बच्चों की मौत हो गई थी.

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आज आएगी टीम

बच्चों की लगातार हो रही मौत के बीच आज केंद्र से एक जांच टीम मुजफ्फरपुर पहुंचेगी. केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की सात सदस्यीय टीम पटना पहुंच चुकी है.

कम पड़ रह हैं ICU

शहर के दो अस्पतालों में अब तक 48 बच्चों की मौत हो चुकी है. बच्चों की बीमारी को देखते हुए चार ICU चालू किए गए हैं, फिर भी बेड कम पड़ रहे हैं. एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है. इस बीच SKMCH से अच्छी खबर भी आ रही है और इलाज के लिए भर्ती कुछ बीमार बच्चे ठीक हो रहे हैं. 6 बच्चों को इलाज के बाद PICU से सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया गया है.

एक्शन में सरकार

इससे पहले सूबे के सीएम नीतीश कुमार ने सोमवार को इस मामले में विभाग के प्रधान सचिव को ध्यान देने की नसीहत दी. सीएम ने कहा था कि बच्चों की मौत पर सरकार चिंतित है और इससे कैसे निपटा जाए इस पर काम चल रहा है. सीएम ने मुख्य सचिव को AES पर खुद नजर रखने का निर्देश दिया. जबकि इस बीमारी को लेकर उन्‍होंने जागरुकता फैलाने की जरुरत बताई है.

स्वास्थ्य मंत्री की सफाई

स्वास्थ्य मंत्री ने इन मौतों का कारण कुछ और बताया था. मंगल पाण्डेय ने सोमवार को कहा था कि अभी तक 11 बच्चों के मौत की पुष्टि हुई है, लेकिन इसमें एईएस यानी इनसेफेलाइटिस से अभी तक किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है. उन्‍होंने कहा कि हाईपोगलेसिमिया से 10 बच्चों की मौत हुई है जबकि एक बच्चे की मौत जापानी इनसेफेलाइटिस से हुई है. जबकि बच्चों की मौत को लेकर विभाग गम्भीर है. बिहार में AES यानि (एक्यूट इन्सेफेलाइटिस) से 12 जिले और 222 प्रखंड प्रभावित हैं.

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