AES के कहर से नीतीश सरकार को हो सकती है ये परेशानी, केंद्र ने दी सलाह

संक्षेप:

  • AES का कहर
  • केंद्र की बिहार को सलाह
  •  CM नीतीश ने बुलाई बैठक

बिहार में  AES (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिड्रोम) यानी चमकी बुखार का कहर लगातार जारी है. मुजफ्फरपुर में अकेले  इससे 115 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.  हालात लगातार  बिगड़ने की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आंतरिक बैठक बुलाई है. इस बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे.

दूसरी तरफ केंद्र की तरफ से बिहार सरकार को इस संबंध में सलाह भी दी गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मरीजों द्वारा बेड की कमी को लेकर मिली शिकायतों पर कहा है कि राज्य के कम से कम 10 जिलों में बच्चों के लिए आईसीयू बनाया जाए. इसके अलावा केंद्र ने श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH), मुजफ्फरपुर में बच्चों के लिए आईसीयू में 100 बेड बनाने को कहा है. केंद्र ने यह भी कहा कि राज्य में कम से कम 5 वायरोलॉजी लैब्स बनाए जाएं.

रविवार को ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, राज्य मंत्री अश्विनी चौबे और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय मुजफ्फरपुर में हालात का जायजा लेने के लिए पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि एईएस से दोबारा इतने बच्चों की मौत न हो, इसके लिए लगातार प्रयास और रिसर्च किया जाएगा. रविवार को बिहार के मुजफ्फरपुर पहुंचे हर्षवर्धन ने बिहार सरकार को आश्वासन दिया था कि AES की रोकथाम के लिए हाई क्वालिटी का रिसर्च सेंटर बनेगा और 1 साल के भीतर ये रिसर्च सेंटर पूरा होगा.

ये भी पढ़े : सलमान खुर्शीद बोले- चुनाव जीतना तो दूर, कांग्रेस अपना भविष्य तक नहीं कर सकती तय


हर्षवर्धन ने कहा था कि उन्‍होंने एक डॉक्टर होने के नाते भी लोगों को देखा है और हर बात की बारीकी से जानकारी ली है. जहां तक मौत की बात है तो पिछले वर्षों में कुछ कमी आई थी. वर्ष 2014 में ज्यादा संख्या में केस सामने आए थे, लेकिन इस साल फिर संख्या में बढ़ोतरी हुई है. सभी मरीजों के लक्षण एक जैसे हैं, लेकिन जो समय पर अस्पताल पहुंच रहे हैं, उनको बचाया जा रहा है.

If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Related Articles