खगोल वैज्ञानिकों ने नासा के फर्मी गामा-रे स्पेस टेलीस्कोप से, अब तक का सबसे छोटा गामा-रे विस्फोट की खोज

संक्षेप:

  • अब तक का सबसे छोटा गामा-रे विस्फोट की हुई खोज
  • सुपरनोवा फिजल्ड गामा रे विस्फोट नाम दिया गया
  • यह विस्फोट किसी विशाल तारे की मौत के बाद हुआ

नैनीताल। खगोल वैज्ञानिकों की टीम ने अंतरिक्ष में स्थित नासा के फर्मी गामा-रे स्पेस टेलीस्कोप से एक ऐसे विस्फोट की खोज की है, जो अब तक का सबसे छोटा गामा रे विस्फोट (जीआरबी) होगा। यह विस्फोट किसी विशाल तारे की मौत के बाद हुआ। इसे सुपरनोवा फिजल्ड गामा रे विस्फोट नाम दिया गया। इसे खोजने वाले खगोल वैज्ञानिकों की टीम में एरीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडेय भी बतौर सदस्य शामिल रहे।

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. शशि भूषण पांडेय ने बताया कि इस घटना ने गामा किरण विस्फोट के क्षेत्र में वैज्ञानिकों को पहले से कहीं अधिक कुछ सीखने और समझने का मौका दिया। कहा कि इससे गामा किरण को और अधिक गहराई से समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि खोज दल में शामिल गोडार्ड के खगोलशास्त्री और अहुमादा के शोध सलाहकार लियो सिंगर का कहना था कि अगर यह विस्फोट एक संकुचित होते तारे के कारण हुआ था, तो इसकी उत्तरदीप्ति के लुप्त होने के बाद अंतर्निहित सुपरनोवा विस्फोट के कारण इसे फिर से चमकना चाहिए। ऐसी दूरियों पर सुपरनोवा के प्रकाश को उसकी गैलेक्सी की चमक में से पहचानने के लिए एक बहुत बड़ी और बहुत संवेदनशील दूरबीन की जरूरत होती है।

डॉ. पांडेय ने बताया कि इस खोज के लिए सिंगर को हवाई में स्थित 8.1 मीटर जेमिनी नॉर्थ टेलीस्कोप और जेमिनी मल्टी ऑब्जेक्ट स्पेक्ट्रोग्राफ नामक एक संवेदनशील उपकरण के उपयोग के लिए समय आवंटित किया गया था। खगोलविदों ने विस्फोट के 28 दिनों के बाद संबंधित आकाशगंगा का लाल और अवरक्त प्रकाश में प्रेक्षण किया। 45 और 80 दिनों के बाद इसे दोहराया। उन्होंने पहले प्रेक्षण संग्रह में एक निकट-अवरक्त स्रोत उस सुपरनोवा का पता लगाया जो बाद के प्रेक्षणों में नहीं देखा जा सका।

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डॉ. पांडेय का कहना है कि यह विस्फोट ऐसे जेटों के कारण हुआ होगा जो तारे से बमुश्किल बाहर निकलकर बंद हो गए। यदि ब्लैक होल से कमजोर जेट उत्सर्जित हुए होते या तारा अपने पतन के समय बहुत विशाल होता तो जीआरबी बिल्कुल न होने की संभावना होती। कहा कि यह खोज लंबे समय से असुलझी पहेली को सुलझाने में मदद करेगा। उन्होंने बताया कि फर्मी गामा रे टेलीस्कोप, खगोल भौतिकी एवं कण भौतिकी की साझेदारी हैं। इसका प्रबंधन नासा की ग्रीनबेल्ट, मेरीलैंड स्थित गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर की ओर से किया जाता है। फर्मी दूरबीन का विकास अमेरिका के परमाणु उर्जा विभाग के सहयोग से किया गया है। इसमें फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, स्वीडन एवं अमेरिका के शैक्षिक संस्थानों और अन्य सहभागियों का महत्वपूर्ण योगदान है।

सौरमंडल का विनाश करने की ताकत रखती हैं ये शक्ति

सुपरनोवा व जीआरबी ब्रह्मांड के वह विस्फोट हैं जो तारों के अंत समय में ब्लैक होल को जन्म दे सकते हैं। ऐसे विस्फोट जेट जैसी महा ऊर्जावान स्थिति का निर्माण करते हैं। जो अपने सामने वाले तारों व ग्रहों को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। यदि ऐसा कोई विस्फोट हमसे नजदीक या हमारी आकाशगंगा में होगा तो वह पृथ्वी समेत हमारे सौरमंडल का विनाश कर जाएगा। पांच सौ प्रकाश वर्ष की दूरी पर होने वाला विस्फोट भी हमारे सेटेलाइट व संचार व्यवस्था को बाधित कर सकता है। महाविस्फोट करने वाले तारे सूर्य से कई गुना बड़े होते हैं

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