हरिद्वार के वो स्वतंत्रता सेनानी जिसने अंग्रजी हुकूमत की नाक के नीचे 3 जगह फहराया था तिरंगा

संक्षेप:

  • जगदीश वत्स एक ऐसा नाम है जिन्होंने छोटी सी उम्र में ही देश के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया
  • ब्रिटिश सरकार की पुलिस की गोली से जगदीश वत्स शहीद हो गए थे
  • हर वर्ष हरिद्वार में शहीद जगदीश वत्स दिवस मनाया जाता है।

देश को स्वतंत्रता दिलाने में न जाने कितने ही वारों ने अपने प्राणों की आहूति दी। उन्हीं वीर स्वतंत्रता सेनानियों में एक नाम और है और वो नाम है जगदीश वत्स। जिन्हें कई लोग आज भी नहीं जानते। लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन में जगदीश वत्स एक ऐसा नाम है जिन्होंने छोटी सी उम्र में ही देश के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया था। ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज के छात्र रहे जगदीश वत्स ने 14 अगस्त 1942 में हरिद्वार में सुभाष घाट, पोस्ट ऑफिस और रेलवे स्टेशन इन जगहों पर तिरंगा फहाराया था। इसके बाद तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की पुलिस की गोली से जगदीश वत्स शहीद हो गए थे। हर वर्ष हरिद्वार में शहीद जगदीश वत्स दिवस मनाया जाता है।

आजादी की लड़ाई के लिए जहां पूरा देश संघर्ष कर रहा था उसी दौर में ऋषिकुल के स्नातक जगदीश वत्स ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ऐतिहासिक सुभाष घाट पर तिरंगा फहराने की ठानी। उन्होंने एक नहीं तीन तिरंगे अपने साथ लिए। कुछ साथियों के साथ वंदेमातरम गाते जगदीश वत्स सुभाष घाट पहुंचे और देखते ही देखते तिरंगा फहरा दिया।

जगदीश वत्स की जानकारी जैसे ही अंग्रेज पुलिस को मिली वह सुभाष घाट की तरफ दौड़ी। जगदीश वत्स पर तो मानो दीवानगी सवार थी। वे अपने चंद साथियों के साथ भारतमाता के तराने गाते हुए कोतवाली पहुंचे और बगल में स्थित डाकघर पर तिरंगा फहरा दिया। आजादी का यह दीवाना लोगों से साथ आने का आह्वान करता हुआ रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ा। उसने स्टेशन की छत पर चढ़कर जैसे ही तिरंगा फहराया, तब तक वहां पहुंच चुकी अंग्रेज पुलिस के कोतवाल ने उन्हें छत पर ही गोलियों से भून दिया। आजादी का यह दीवाना राष्ट्र की वेदी पर शहीद हो गया। जगदीश वत्स की स्मृति में हरिद्वार में शहीद पार्क की स्थापना की गई है।

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