कौन है नोएडा का ऋषभ रंजन जिसकी याचिका पर SC ने मुंबई के आरे में पेड़ काटने पर लगाई रोक?

संक्षेप:

  • नोएडा के ऋषभ रंजन ने आरे में पेड़ काटने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी. 
  • कोर्ट ने भी ऋषभ की याचिका का संज्ञान लेते हुए आरे में पेड़ काटने पर रोक लगा दी है.
  • ऋषभ रंजन ग्रेटर नोएडा के लॉयड लॉ कॉलेज में लॉ का छात्र है.

नोएडा: जिस वक्त आरे (महाराष्ट्र) में पेड़ काटे जा रहे थे उस समय ऋषभ रंजन छुट्टी में अपने घर जमशेदपुर था. वो दुर्गा पूजा में शामिल होने के लिए कॉलेज से छुट्टी लेकर गया था. लेकिन जैसे ही उसे पता चला कि आरे में पेड़ काटे जा रहे हैं. इसका विरोध करने वालों को पुलिस गिरफ्तार कर रही है तो दूसरे दिन दिल्ली पहुंचकर उसने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर दी. और अच्छी बात ये रही कि कोर्ट ने भी ऋषभ की याचिका का संज्ञान लेते हुए आरे में पेड़ काटने पर रोक लगा दी है.

आरे के ही नहीं हर एक पेड़ को बचाना है

ऋषभ ने बताया कि उनके पास आरे के मामले में पेड़ों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा था. अगर आज देरी करते तो आरे के पेड़ों की जिंदगी नहीं बच पाती. मेरा मकसद सिर्फ आरे के पेड़ों को बचाना ही नहीं है, मैं चाहता हूं जंगल तक में लगे हर एक पेड़ को बचाया जाए. ये शुरुआत है, लड़ाई तो आगे जारी रहेगी.

ये भी पढ़े : खाद वितरण में लापरवाही पर मुख्‍यमंत्री कमलनाथ (Chief Minister Kamal Nath) ने सख्ती दिखाई है


जलवायु पर चर्चा हो तो अच्छी लगती है सियासत

ऋषभ का कहना है कि मुझे सियासत से कोई गुरेज नहीं है. लेकिन हां आजकल जिस तरह की सियासत हो रही है उससे मैं कतई इत्तेफाक नहीं रखता. सियासत वो अच्छी लगती है जहां जलवायु पर चर्चा हो. प्रकृति को बचाने की बात हो. इसके लिए जरूरी है कि हम सब मिलकर वैकल्पिक सियासत के बारे में सोचें.

ग्रेटर नोएडा में लॉ कॉलेज का छात्र है ऋषभ

ऋषभ रंजन ग्रेटर नोएडा के लॉयड लॉ कॉलेज में लॉ का छात्र है. उसकी पढ़ाई का ये चौथा साल है. अगले साल वो एक वकील बन जाएगा. उन्होंने कहा कि इससे पहले वो सूखा और किसानों की आत्महत्या के मामले में काम करते रहे हैं. उसी के संबंध में दूसरे लोगों के साथ सुप्रीम कोर्ट आते थे. बिहार में बाढ़ को लेकर भी खासे सक्रिय रहे ऋषभ ने सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ी हुई थी.

‘इस मुहिम में मैं अकेला नहीं हूं’

सूखा, किसान और अब आरे. ऋषभ का कहना है कि ये सब वो मुद्दे हैं जिन्हें लेकर हम सुप्रीम कोर्ट गए और हमे राहत भी मिली. लेकिन सच तो ये है कि इस मुहिम में मैं अकेला नहीं हूं. आज जब आरे वाले मामले के लिए मैं घर से निकला था तो सोशल मीडिया की मदद से अपने सभी सीनियर, जूनियर से मदद मांगी. और आज जब आरे में कोर्ट ने रोक लगाई है तो उस केस में मेरा साथ हमारे एल्युमिनाई संजय हेगड़े ने दिया है.

If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Read more Noida News In Hindi here. देशभर की सारी ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के लिए
NYOOOZ HINDI को सब्सक्राइब करें |

Related Articles