पंचायत चुनावों में बीजेपी को झटका, सपा ले मारी बाज़ी, पीएम संसदीय क्षेत्र में भी भाजपा हारी

संक्षेप:

  • यूपी जिला पंचायत चुनाव
  • भाजपा को लगा तगड़ा झटका
  • सपा ने बीजेपी को पछाड़ मारी बाज़ी

नोएडा। यूपी ज़िला पंचायत चुनावों में प्रचार के समय जो क़यास लगागए जा रहे थे वे सब इन चुनावों के परिणाम आने के बाद एकदम विपरीत दिखाई पड़ते हैं. सत्ताधारी दल भाजपा को जिल पंचायत चुनावों में तगड़ा झटका लगा है। कुल 3050 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा को महज 543 सीटों पर जीत या बढ़त मिली है। वहीं सपा 699 सीटों पर जीत या बढ़त बना हुए है। 75 जिलों के नतीजों में से सिर्फ 13 में ही भाजपा दहाई के आकड़े तक पहुंच पाई है।
 
पीएम के संसदीय क्षेत्र में बीजेपी की हार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 40 में से भाजपा महज 7 और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के क्षेत्र लखनऊ की 25 में से महज तीन सीटें जीत सकी है। वहीं, सीएम योगी आदित्यनाथ के जिले गोरखपुर में 68 में से 26 सीटें तो जोतीं पर स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका है। अवेध्या में वह 8 सीट पर सिमट गई। वहीं, सोनिया गांधी के चुनाव क्षेत्र रायबरेली में भी 52 सीटों में से सपा ने 12 जीतीं, तो कांग्रेस-भाजपा को 9-9 सीटें ही मिलीं। 

बसपा, रालोद, कांग्रेस, सुभासपा, अपना दल और आप ने भी कुछ जिलों में जीत दर्ज की है। निर्दलीय व अन्य 961 सीटों पर आगे हैं। पश्चिम में किसानों की नाराजगी का सीधा लाभ सपा-बसपा के अलावा राष्ट्रीय लोकदल को मिला है।
 
भाजपा के लिए ये परिणाम चिंताजनक

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जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव पहली बार दलीय आधार पर हुए हैं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को इन चुनावों से खासी उम्मीदें थीं। पर नतीजों ने खतरे की घंटी बजा दी।
 
इन दलों का खाता खुला

किसान आंदोलन के चलते पश्चिमी यूपी में जहां रालोद का प्रदर्शन ठीक रहा है, वहीं, चंद्रशेखर आजाद की भीम आर्मी और असदुद्दीन औवेसी की एआईएमआईएम का खाता भी खुल गया है।
 
पूर्ण परिणामों में हुई काफी देरी

आयोग मतगणना के तीसरा दिन बिताने के बावजूद देर रात तक ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान व क्षेत्र पंचायत चुनाव के भी फाइनल रिजल्ट जारी नहीं कर पाया। 

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