बीजेपी सांसद उदित राज ने छोड़ी मोदी की `चौकीदारी`, थामा कांग्रेस का हाथ

संक्षेप:

  • टिकट कटने से नाराज चल रहे भाजपा सांसद उदित राज ने आज कांग्रेस का दामन थाम लिया है।
  • पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें कांग्रेस की सदस्यता दिलाई।
  • इससे पहले उदित राज ने एक प्रेस नोट जारी कर बताया था कि क्‍यों उन्‍हें टिकट नहीं दिया.

टिकट कटने से नाराज चल रहे भाजपा सांसद उदित राज ने आज कांग्रेस का दामन थाम लिया है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें कांग्रेस की सदस्यता दिलाई। उत्तर-पश्चिम दिल्ली से वर्तमान सांसद और दलित नेता को 2019 लोकसभा चुनाव के लिए टिकट न देकर भाजपा ने पंजाबी गायक हंस राज हंस पर भरेसा जताया। इसको लेकर उदितराज नाराज चल रहे थे। हंसराज को टिकट मिलने से पहले ही उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से नाम के आगे से चौकीदार हटा लिया था, हाला की पांच घंटे बाद ही उन्होंने अपने नाम के आगे यह शब्द लगा लिया। इसके बाद यह मान लिया गया था की पार्टी ने उन्हें मना लिया है और उत्तर प्रदेश के किसी सीट पर उन्हेें टिकट देकर संतुष्ट कर लिया जाएगा। उदित ने आज राहुल गांधी से मिलकर कांग्रेस की सदस्यता ले ली।

उदित राज का ट्विटर अकाउंट
दरअसल, मंगलवार को टिकट नहीं मिलने की आशंका को देखते हुए हंसराज हंस के नाम के ऐलान से पहले ही उत्तर पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी (BJP) सांसद उदित राज (Udit Raj) ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकांउट पर अपने नाम के आगे `चौकीदार` शब्द (Chowkidar Udit Raj) हटा दिया था. मगर फिर कुछ घंटे बाद ही उन्होंने `चौकीदार` शब्द लगा लिया. ऐसे में अटकलें लगाए जाने लगी थीं कि उदित राज मान गए हैं और वह पार्टी में बने रहेंगे. मगर बुधवार को उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर बीजेपी को अपना फैसला सुना दिया.
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इससे पहले ट्विटर पर उन्होंने अपने नाम के आगे से चौकीदार शब्द हटाकर सिर्फ डॉ. उदित राज, एमपी ही लिखा था. उदित ने मंगलवार की सुबह कुल तीन ट्वीट किए. पहले ट्वीट में में उन्होंने लिखा, `मुझे अब भी उम्मीद है कि मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र और भाजपा से नामांकन दाखिल करूंगा जहां से मैंने कड़ी मेहनत की है और खुद को साबित किया है. मुझे उम्मीद है कि मैं खुद बीजेपी छोड़ने को मजबूर नहीं होऊंगा.` बता दें कि दिल्ली में 12 मई को चुनाव होंगे.

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इससे पहले उदित राज ने एक प्रेस नोट जारी कर बताया था कि क्‍यों उन्‍हें टिकट नहीं दिया. उदित राज ने अपने प्रेस नोट में पांच कारण बताए थे-

क्या मोदी जी के नेतृत्व में आंख मूंदकर विश्वास करते हुए अपनी पार्टी `इंडियन जस्टिस पार्टी` का बीजेपी में विलय कर दिया. अपना दल जैसे छोटी पार्टियां ज्यादा फायदे में रहीं कि जनाधार स्थानीय होने के बावजूद बहुत कुछ लिया.

क्या मेरी यह खता थी कि मैं भाजपा में दलित नेता के नाम से जाना जाता रहा और 2014 में जब मैं पार्टी में शामिल हुआ था तो व्यापक जन समर्थन लोकसभा के चुनाव में मिला. क्या पार्टी को जनाधार वाला दलित नेता नहीं चाहिए? क्या मैंने समय-समय पर दलितों की आवाज़ उठाई?

दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीलिंग के विरोध में सुप्रीम कोर्ट का घेराव क्या गलती थी? मैं हैरान इस बात से हूं कि इनमें से सारे कारण हैं या कौन से कारण हैं? जिसकी वजह से मेरा टिकट काटा?

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