BSNL के 1.7 लाख कर्मचारियों को नहीं मिलेगी जून की सैलरी!

संक्षेप:

  • सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल (BSNL) ने सरकार से कहा है कि कंपनी के पास कामकाज जारी रखने के लिए पैसे नहीं हैं.
  • कंपनी ने कहा है कि कैश की कमी के चलते जून के लिए लगभग 850 करोड़ रुपये की सैलरी दे पाना मुश्किल है.
  • बीएसएनएल की करीब 55 फीसदी आमदनी वेतन भुगतान में जाती है.

नोएडा: देश की सबसे बड़ी सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल (BSNL) ने सरकार से कहा है कि कंपनी के पास कामकाज जारी रखने के लिए पैसे नहीं हैं. कंपनी ने कहा है कि कैश की कमी के चलते जून के लिए लगभग 850 करोड़ रुपये की सैलरी दे पाना मुश्किल है. आपको बता दें कि बीएसएनएल की करीब 55 फीसदी आमदनी वेतन भुगतान में जाती है. वहीं, कंपनी का वेतन बिल सालाना 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है. कंपनी की आमदनी स्थिर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद 3 महीने पहले बीएसएनएल की आर्थिक हालत का जायजा लिया था और इस दौरान कंपनी के चेयरमैन ने पीएम को एक प्रेजेंटेशन भी दी थी. हालांकि, इस बैठक के बाद भी इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकल पाया कि लगभग 1.7 लाख कर्मचारियों वाली कंपनी किस तरह खुद को संकट से उबार पाएगी.

आखिर क्यों नहीं मिल रही है सही टाइम पर सैलरी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीएसएनएल देश की सबसे ज्यादा घाटे वाली कंपनी में से है. ब्रोकरेज हाउस की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएसएनएल ने दिसंबर, 2018 के आखिर तक 90,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का ऑपरेशनल घाटा उठाया. एमटीएनएल में आमदनी के मुकाबले सैलरी का अनुपात बढ़कर 90 फीसदी तक पहुंच गया है. वहीं बीएसएनएल में यह करीब 67-70 फीसदी है. एमटीएनएल पर करीब 20,000 करोड़ का कर्ज है, जबकि उसकी सालाना आमदनी 2,700 करोड़ रुपये है. बीएसएनएल पर 13,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जबकि सालाना आमदनी 32,000 करोड़ है. यह भी अनुमान है कि अगले 5 से 6 सालों में एमटीएनएल के 16,000 कर्मचारी और बीएसएनएल के करीब आधे कर्मचारी रिटायर हो जाएंगे.

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प्रधानमंत्री को लिखी चिट्टी

ऑल इंडिया ग्रेजुएट इंजीनियर्स एंड टेलीकॉम ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIGETOA) ने इससे पहले 18 जून को एक पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया था कि पैसों की समस्या से जूझ रही बीएसएनएल को आर्थिक रूप से सहायता मुहैया कराएं. इंजीनियरों ने पत्र में लिखा, `पैसों की कमी के चलते कंपनी का कामकाज और सेवाओं का मेंटेनेंस प्रभावित हो रहा है. हमें पूरा विश्वास है कि इस आर्थिक संकट से बाहर आने में सरकार की तरफ से जो भी आर्थिक सहायता हमें मिलेगी, उससे बीएसएनएल फिर से लाभकारी कंपनियों में शामिल हो सकेगी.`

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