भारत ने रचा इतिहास, लॉन्च हुआ Chandrayan- 2

संक्षेप:

  • इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी ISRO ने श्री हरिकोटा से सफलतापूर्वक आज चंद्रयान-2 लॉन्च कर दिया.
  • अंतरिक्ष की दुनिया में हिंदुस्तान ने आज एक बार फिर इतिहास रच दिया है.
  • चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग चांद के साउथ पोल पर एक रोवर को उतारने के उद्देश्य से की जा रही है.

श्री हरिकोटा: अंतरिक्ष की दुनिया में हिंदुस्तान ने आज एक बार फिर इतिहास रच दिया है. इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी ISRO ने श्री हरिकोटा से सफलतापूर्वक आज चंद्रयान-2 लॉन्च कर दिया.आज दोपहर 2.43 मिनट पर इसे लॉन्च किया गया.

साउथ पोल पर होगी लैंडिंग

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चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग चांद के साउथ पोल पर एक रोवर को उतारने के उद्देश्य से की जा रही है. अभी तक इस जगह पर कोई भी देश नहीं पहुंचा है. चांद के साउथ पोल पर स्पेसक्राफ्ट उतारने के बाद भारत ऐसा करने वाला पहला देश बन जाएगा.
मिशन मून के तहत चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखेगा. दरअसल, चांद को फतह कर चुके अमेरिका, रूस और चीन ने अभी तक इस जगह पर कदम नहीं रखा है. चंद्रमा के इस भाग के बारे में अभी बहुत जानकारी भी सामने नहीं आ पाई है. भारत के चंद्रयान-1 मिशन के दौरान साउथ पोल में बर्फ के बारे में पता चला था. तभी से चांद के इस हिस्से के प्रति दुनिया के देशों की रूचि जगी है. भारत इस बार के मिशन में साउथ पोल के नजदीक ही अपना यान लैंड करेगा. ऐसे में माना जा रहा है कि भारत मिशन मून के जरिए दूसरे देशों पर बढ़त हासिल कर लेगा. कहा जा रहा है कि चंद्रयान-2 के जरिए भारत एक ऐसे अनमोल खजाने की खोज कर सकता है जिससे न केवल अगले करीब 500 साल तक इंसानी ऊर्जा जरूरतें पूरी की जा सकती हैं बल्कि खरबों डॉलर की कमाई भी हो सकती है. चांद से मिलने वाली यह ऊर्जा न केवल सुरक्षित होगी बल्कि तेल, कोयले और परमाणु कचरे से होने वाले प्रदूषण से मुक्त होगी.

रॉकेट में एक `तकनीकी दिक्कत` के कारण 15 जुलाई की सुबह इसे लॉन्च होने से रोक दिया गया था. दिक्कत तब आई थी, जब लिक्विड प्रोपेलेंट को रॉकेट के स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर-स्टेज इंजन में लोड किया जा रहा था.
कुल लागत 978 करोड़ रुपये

चंद्रयान-2 मिशन पर कुल 978 करोड़ रुपये की लागत आई है. करीब एक दशक पहले चंद्रयान-1 ने चांद की सतह पर पानी की खोज की थी, जो बड़ी उपलब्धि थी. यही वजह है कि भारत ने दूसरे मून मिशन की तैयारी की. चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा जहां उम्मीद है कि बहुतायत में पानी मौजूद हो सकता है.

हिलियम-3 गैस की भी संभावना तलाशेगा

चंद्रयान-2 मिशन के तहत चांद की सतह पर एक रोवर को उतारा जाएगा जो अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होगा. रोवर चांद की मिट्टी का विश्लेषण करेगा और उसमें मिनरल्स के साथ-साथ हिलियम-3 गैस की संभावना तलाशेगा, जो भविष्य में ऊर्जा का संभावित स्रोत हो सकता है.

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