DU छात्र राजनीति, जेपी आंदोलन, कानून मंत्री से लेकर वित्त मंत्री तक, ऐसा था अरुण जेटली का राजनीतिक सफर

संक्षेप:

  • चाहे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार हो या नरेंद्र मोदी की वे हमेशा प्रधानमंत्री के भरोसेमंद मंत्रियों में रहे.
  • अरुण जेटली में नेतृत्व का उदय जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से हुआ था.
  • वास्तव में चुनावी राजनीति से उनका स्वभाव मेल नहीं खाता था. वे अध्ययनशील थे और देश, समाज के उत्थान के चिंता करने वाले थे.

नई दिल्ली: अरुण जेटली (Arun Jaitley) कभी लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में नहीं पहुंचे लेकिन वह चाहे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार हो या नरेंद्र मोदी की वे हमेशा प्रधानमंत्री के भरोसेमंद मंत्रियों में रहे. वास्तव में चुनावी राजनीति से उनका स्वभाव मेल नहीं खाता था. वे अध्ययनशील थे और देश, समाज के उत्थान के चिंता करने वाले थे. अरुण जेटली में नेतृत्व का उदय जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से हुआ था. छात्र जीवन में ही भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करने वाले अरुण जेटली ने वित्त मंत्रालय, कार्पोरेट मामले के मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कानून मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय संभाला. वे जहां भी रहे, सराहना हासिल करते रहे.

1974 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संगठन से की राजनीति की शुरूआत

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दिग्गज नेता और प्रसिद्ध वकील अरुण जेटली का जन्म 28 दिसम्बर 1952 नई दिल्ली में हुआ था. वकील महाराज किशन जेटली और रतन प्रभा जेटली के पुत्र अरुण जेटली ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली के सेंट जेवियर्स स्कूल में 1957 से 1969 के दौरान ली. उन्होंने सन 1973 में दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बीकॉम किया. इसके बाद उन्होंने सन 1977 में दिल्ली विश्‍वविद्यालय से लॉ की डिग्री हासिल की. वे सन 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संगठन के अध्यक्ष भी रहे. अरुण जेटली ने 24 मई 1982 को संगीता जेटली से विवाह किया. उनके दो बच्चे पुत्र रोहन और पुत्री सोनाली हैं. अरुण जेटली वेजेटेरियन थे और पंजाबी ब्राह्मण थे. उन्हें अध्ययन करने और लिखने का शौक था. उन्होंने कानून की कई पुस्तकें लिखीं.

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इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी के खिलाफ जमकर आंदोलन में हिस्सा लिया

अरुण जेटली दिल्ली यूनिवर्सिटी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र नेता थे. बाद में वे दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष भी चुने गए. सन 1973 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने भ्रष्टाचार समेत देश के कई तत्कालीन मुद्दों को लेकर संपूर्ण क्रांति आंदोलन शुरू किया जिसको देश भर में व्यापक समर्थन मिला. अरुण जेटली ने भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. अरुण जेटली सन 1975 में आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय रहे. उस दौर में वे युवा मोर्चा के संयोजक थे. उन्हें आपातकाल के दौरान 19 महीने कानूनी हिरासत में रहना पड़ा था. वे पहले अंबाला जेल में और फिर तिहाड़ जेल में रहे थे. जेल से वापसी के बाद अरुण जेटली ने जनसंघ की सदस्यता ले ली. सन 1977 में अरुण जेटली लोकतांत्रिक युवा मोर्चा के संयोजक बने.

अरुण जेटली सीए बनना चाहते थे

अरुण जेटली सीए बनना चाहते थे लेकिन उन्होंने अपने पिता के पेशे वकालत को ही अपनाया. राजनीति में आने से पहले अरुण जेटली सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहे थे. सन 1977 में एलएलबी करने के बाद अरुण जेटली सुप्रीम कोर्ट और देश के कई उच्च न्यायालयों में वकालत करने लगे थे. जनवरी 1990 में अरुण जेटली को दिल्ली हाईकोर्ट ने वरिष्ठ वकील नामित किया. अरुण जेटली को सन 1989 में वीपी सिंह सरकार के दौर में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था. इस दौरान उन्होंने बोफोर्स घोटाले की जांच की तफसील तैयार की थी. जेटली ने भारतीय ब्रिटिश विधिक न्यायालय के समक्ष `भारत में भ्रष्टाचार और अपराध` विषय पर दस्तावेज प्रस्तुत किए. जून 1998 में नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून को अधिनियमित करने के उद्देश्य से आयोजित संयुक्त राष्ट्र संघ सम्मेलन में वे भारत सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल हुए थे. विधिक और समसामयिक समस्याओं पर अनेक जेटली ने कई पुस्तकें लिखीं. लालकृष्ण आडवाणी, माधवराव सिंधिया समेत कई वरिष्ठ नेता अरुण जेटली के क्लाइंट रहे हैं.

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