बुलंदशहर हिंसा: अख़लाक़ हत्याकांड में जांच अधिकारी रह चुके थे सुबोध कुमार

संक्षेप:

  • बुलंदशहर हिंसा का मामला
  • अख़लाक़ केस में भी जांच अधिकारी थे सुबोध कुमार
  • गौतमबुद्धनगर पुलिस विभाग में भी गम का माहौल

नोएडा: बुलंदशहर में हिंसा में जान खोने वाले इंस्पेक्टर सुबोध कुमार दादरी के अख़लाक़ केस में जांच अधिकारी थे. अख़लाक़ केस में मौके पर पहुंचने वाले वो पहले अधिकारी थे. इंस्पेक्टर सुबोध ने इस मामले में 28 सितंबर 2015 से 9 नवंबर 2015 तक यानि एक माह 12 दिन जांच की थी.

बुलंदशहर के स्याना में लोगों की भीड़ प्रदर्शन कर रही थी. भीड़ ने थाने पर हमला कर दिया और तोड़फोड़ करनी लगी. कम पुलिसबल होने के बावजूद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार मौके पर डटे रहे. भीड़ ने पत्थर बरसाने शुरू कर दिए. स्थिति को काबू में करने के लिए सुबोध कुमार को फायरिंग करनी पड़ी. इस दौरान वे सिर में चोट लगने से बुरी तरह घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई.

इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की मौत से गौतमबुद्धनगर पुलिस विभाग में भी गम का माहौल है. सुबोध कुमार जिले के बादलपुर और जारचा में कोतवाल प्रभारी के पद पर तैनात रहे थे. सितंबर 2015 में दादरी के बिसाहड़ा गांव में गोमांस के शक में भीड़ ने अख़लाक़ को पीट-पीटकर मार दिया था. इस्पेक्टर सुबोध कुमार ने अख़लाक़ के पूरे मामले में बड़ी भूमिका निभाई थी.

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आपको बता दें, इस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह का जन्म एटा के थाना जैथरा के एक गांव में हुआ था. 26 अगस्त 2018 को उन्हें बुलंदशहर की स्याना कोतवाली का प्रभार दिया गया. यूपी पुलिस ने कहा है कि पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है.

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