लोकसभा चुनाव: ये फैक्टर तय करेगा नोएडा में किसकी होगी जीत?

दिल्ली से सटी गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट का इतिहास बहुत पुराना नहीं है.  लोकसभा सीटों के परिसीमन के बाद इस सीट का जन्म हुआ. पहले इस सीट का बड़ा हिस्सा बुलंदशहर खुर्जा लोकसभा सीट में आता था. बात करें इस सीट के राजनीतिक इतिहास की, तो सीट बनने के बाद पहली बार 2009 में इस सीट पर लोकसभा चुनाव हुए और बहुजन समाज पार्टी ने बाजी मारी. बीएसपी उम्मीदवार सुरेन्द्र नागर ने बीजेपी उम्मीदवार महेश शर्मा को हराकर इस सीट पर कब्जा कर लिया. लेकिन जीत का अंतर सिर्फ 15904 वोटों का रहा. इसके बाद 2014 की मोदी लहर में बीजेपी और महेश शर्मा दोनों ने इस सीट पर वापसी की और समाजवादी पार्टी उम्मीदवार नरेन्द्र भाटी को 2 लाख 80 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. इस सीट पर बीएसपी को करीब 1 लाख 98 हजार वोट मिले. आंकड़ों पर नजर डालें तो उस चुनाव में बीएसपी को मिले वोट अगर दूसरे  नंबर पर रहे सपा प्रत्याशी के वोट में जोड़ लिए जाते तो भी महेश शर्मा की जीत पक्की थी. अब 2019 के लोकसभा चुनावों में महेश शर्मा के समर्थक इसी आकड़े को जीत का आधार बता रहे हैं. महेश शर्मा (File Photo)googletag.cmd.push(function() { googletag.display('div-gpt-ad-1548417314420-0'); });googletag.cmd.push(function() {googletag.defineSlot('/1039154/Hindi_News18/Hindi_News18_Ros/Hindi_News18_ROS_728x90_MGID', [728, 90], 'div-gpt-ad-1548417314420-0').addService(googletag.pubads());googletag.pubads().enableSingleRequest();googletag.pubads().collapseEmptyDivs();googletag.enableServices();});हालांकि विपक्ष इस दावे को खारिज कर रहा है. विपक्ष का दावा है कि महेश शर्मा की जीत के इतने बड़े अंतर का कारण पिछले चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार का ऐन वक्त पर महेश शर्मा के साथ हो जाना रहा. बात करें 2019 के लोकसभा चुनाव की तो इस बार बीजेपी ने महेश शर्मा को उतारा है तो कांग्रेस ने अरविन्द सिंह चौहान को मैदान में उतारा है. एसपी-बीएसपी गठबंधन ने सतवीर नागर को मैदान में उतारा है, तीनों दलों ने टिकट देने में जातीय गणित का पूरा ध्यान रखा है.नाेएडा के शहरी इलाके में 60 फीसदी वोटर 'बाहरी' वैसे नोएडा सीट का राजनीतिक गणित जानने से पहले नोएडा को दो हिस्सों में बांटना होगा. एक शहरी इलाका और दूसरा ग्रामीण इलाका. शहरी इलाके में जहां 60 फीसदी से ज्यादा वोटर बाहरी हैं और 40 फीसदी के आस-पास स्थानीय हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में बाहरी लोगों की संख्या न के बराबर है. बात करें इस सीट के जातीय आकड़ों की तो बाहरी मतदाताओं का कोई जातीय आकड़ा नहीं है. स्थानीय मतदाताओं में सबसे ज्यादा ठाकुर (क्षत्रिय) मतदाता हैं, उसके बाद गुर्जर और ब्राह्मण मतादातओं की संख्या है. हालांकि कोई सरकारी आंकड़ा इन दावों की पुष्टि नहीं करता लेकिन पार्टियों ने इन्ही दावों पर अपना टिकट बांटा है. File PhotoLoading... (function(){var D=new Date(),d=document,b='body',ce='createElement',ac='appendChild',st='style',ds='display',n='none',gi='getElementById',lp=d.location.protocol,wp=lp.indexOf('http')==0?lp:'https:';var i=d[ce]('iframe');i[st][ds]=n;d[gi]('M370080ScriptRootC285148')[ac](i);try{var iw=i.contentWindow.document;iw.open();iw.writeln(''+'dy>'+'ml>');iw.close();var c=iw[b];}catch(e){var iw=d;var c=d[gi]('M370080ScriptRootC285148');}var dv=iw[ce]('div');dv.id='MG_ID';dv[st][ds]=n;dv.innerHTML=285148;c[ac](dv);var s=iw[ce]('script');s.async='async';s.defer='defer';s.charset='utf-8';s.src=wp+'//jsc.mgid.com/h/i/hindi.news18.com.285148.js?t='+D.getYear()+D.getMonth()+D.getUTCDate()+D.getUTCHours();c[ac](s);})();ऐसे में कांग्रेस जातिगत आकड़े और मुस्लिम वोट बैंक के सहारे जीत का दावा कर रही है, जबकि एसपी-बीएसपी गठबंधन की नजर गुर्जर, अल्पसंख्य़क वोटरों के साथ-साथ उन वोटरों पर भी है जो मोदी सरकार के पांच साल के कार्यकाल और स्थानीय स्तर पर सांसद महेश शर्मा से नाराज हैं. हालांकि इस वोट बैंक पर कांग्रेस भी दावा ठोक रही है. बात करें बीजेपी की, तो बीजेपी उम्मीदवार महेश शर्मा ब्राह्मण वोटरों, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे और अपने द्वार कराए गए कामों पर वोट मांग रहे हैं. हालांकि उनका असली वोट बैंक नोएडा का शहरी वोट बैंक है, जिसके सहारे ही इस सीट को बीजेपी अपनी मजबूत सीटों में मानती रही है. साफ है इस सीट की जातीय गणित, इतिहास और विकास तीनों इस बात का इशारा कर रहे हैं कि लड़ाई त्रिकोणीय होगी और शहरी मतदाओं के मतदान प्रतिशत ये तय करेगा की जीत किसकी होती है?ये भी पढ़ें: 'दुनिया के लोगों को गले लगाया, लेकिन PM मोदी ने काशी के ग्रामीणों को गले नहीं लगाया'लोकसभा चुनाव 2019: अयोध्या जाते वक्त रायबरेली में प्रियंका का हुआ भव्य स्वागतएक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsAppअपडेट्स।

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