दक्षिण एशिया में सबसे बड़ा होगा नोएडा एयरपोर्ट

संक्षेप:

ग्रेटर नोएडा: नोएडा एयरपोर्ट के दूसरे चरण के कार्यों को उत्तर प्रदेश कैबिनेट से मंजूरी मिलने के साथ ही जेवर में देश ही नहीं दक्षिण एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट के बनने की औपचारिक शुरुआत हो गई है। अब दूसरे चरण के लिए फंड जुटाकर जमीन अधिगृहीत करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

ग्रेटर नोएडा: नोएडा एयरपोर्ट के दूसरे चरण के कार्यों को उत्तर प्रदेश कैबिनेट से मंजूरी मिलने के साथ ही जेवर में देश ही नहीं दक्षिण एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट के बनने की औपचारिक शुरुआत हो गई है। अब दूसरे चरण के लिए फंड जुटाकर जमीन अधिगृहीत करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

दूसरे चरण में 3 रनवे यात्री विमानों और एक कार्गो के लिए बनेगा। दूसरे चरण की टेक्निकल इकनॉमिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट (टीईएफआर) बनाने के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) ने पीडब्ल्यूसी को जिम्मेदारी दी थी। पीडब्ल्यूसी ने बीते अक्तूबर माह में ही रिपोर्ट नियाल को सौंप दी थी। इसमें बताया गया कि दूसरे चरण का निर्माण कार्य 2042 में शुरू होगा। यह 4 उप चरणों में 2069 तक पूरा होगा। पहले उप चरण का काम पूरा करने में 8820 करोड़ रुपये, दूसरे में 7121 करोड़, तीसरे में 8228 करोड़ और चौथे उप चरण में 6964 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

टीईएफआर रिपोर्ट के मुताबिक दूसरे चरण के कार्यों के लिए 4751 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी और 31114 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बता दें कि पहले चरण में दो रनवे बनने हैं। इसके लिए ज्यूरिख कंपनी से करार हो चुका है। एक रनवे के साथ 2024 में उड़ान शुरू करने का लक्ष्य है। पहले फेज को बनाने में करीब 29500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। नियाल के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि 5 रनवे बनने के साथ ही यह दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट हो जाएगा।
दूसरे फेज पर एक नजर :

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रनवे निर्माण समय यात्रियों की संख्या

तीसरा रनवे 2042-44 100 मिलियन यात्री प्रति वर्ष
चौथा रनवे 2049-51 140 मिलियन यात्री प्रति वर्ष
पांचवां रनवे 2060-61 190 मिलियन यात्री प्रति वर्ष

 

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