नोएडा के डीएम सुहास एलवाई ने टोक्यो पैरालिंपिक में सिल्वर मेडल जीत रचा इतिहास

संक्षेप:

  • पुरुष सिंगल्स बैडमिंटन स्पर्धा एसएल-4 में जीता रजत पदक।
  • प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी ने दी बधाई।
  • कहा- स्वर्ण पदक खोने का है दुख।

नोएडा- उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने टोक्यो पैरालंपिक खेलों में इतिहास रच दिया है। पुरुष सिंगल्स बैडमिंटन स्पर्धा एसएल-4 में उन्होंने रजत पदक जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। फाइनल में उनका मुकाबला फ्रांस के खिलाड़ी लुकास माजुर के साथ था, जिसमें लुकास ने 2-1 से जीत हासिल की। सुहास की जीत से देश भर में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। खासकर नोएडा के लोगों में विशेष प्रसन्नता देखी जा सकती है। रजत पदक मिलने की खुशी में सुहास को बधाइयों का तांता लग गया है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक उन्हें बधाई दे रहे हैं। उनके परिजनों ने भी जीत पर खुशी जाहिर की है। 

पैरालंपिक खेलों में अपना कमाल दिखाकर देश का सिर गर्व से ऊंचा करने वाले  बैडमिंटन खिलाड़ी और नोएडा के डीएम सुहास एलवाई की जीत पर पूरा देश जश्न मना रहा है। एक नौकरशाह होने के साथ-साथ उन्होंने टोक्यो में खुद को एक बेहतरीन खिलाड़ी भी साबित किया है। सुहास के साहस और खेल प्रतिभा को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी भी खुद को उनसे बात करने से रोक नहीं पाए।
सुहास बताते हैं कि इंडोनेशियाई कोच गिगी बेलात्मा के संरक्षण में ग्रेटर नोएडा की अकादमी में प्रशिक्षण लेना बेहद काम आया। उन्होंने उन्हें तेज गेम खेलना सिखाया जिसका नतीजा यह निकला कि सेमीफाइनल में इंडोनेशियाई फ्रेंडी के खिलाफ उन्होंने अपनी जिंदगी का सर्वश्रेष्ठ मैच खेला। फ्रेंडी दूसरे ग्रुप में सभी को हराकर आए थे, लेकिन उन्होंने सेमीफाइनल में इतना तेज गेम खेला कि फ्रेंडी संभल नहीं पाए।

फाइनल में सुहास का मुकाबला फ्रांस के खिलाड़ी लुकास माजुर के साथ था, जिसमें लुकास ने 2-1 से जीत हासिल की। ऐसे में सुहास ने देश के लिए रजत पदक हासिल किया। इस जीत के बाद उन्हें पीएम मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बधाई दी।

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सुहास कहते हैं कि वह खुश भी हैं लेकिन स्वर्ण पदक खोने का दुख भी है। उनके जीवन में यह ऐसा क्षण था कि खुशी और दुख एक साथ नसीब हो रहा था। खुशी रजत जीतने की थी और दुख स्वर्ण पदक गंवाने का था। सुहास कहते हैं कि वह आगे की नहीं सोच रहे हैं और इस पल को जीना चाहते हैं। 

जीत के जश्न के बीच ही प्रधानमंत्री मोदी ने फोन कर सुहास से बातचीत की और उन्हें बधाई दी। इस बातचीत के दौरान सुहास बेहद उत्साहित और खुश नजर आए। उन्होंने बताया कि कैसे वो केरल के एक छोटे से शहर शिमोगा से निकलकर यहां तक पहुंचे और आज देश के लिए कुछ कर पाए। पीएम मोदी से उन्होंने कहा कि मैंने कभी सोचा नहीं था कि आईएएस बनूंगा या पैरालंपिक खेलों में पदक जीत सकूंगा, लेकिन इन सब के बाद आज मुझे देश के प्रधानमंत्री से सीधे बातचीत का मौका मिला है तो मैं बहुत गौरवांवित महसूस कर रहा हूं।

उनकी इस बात पर पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया कि अरे! आप तो मेरे कलीग हैं। आप गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी हैं और सरकार से जुड़े हुए हैं। सरकार से जुड़ा हुआ हर व्यक्ति मेरा सहकर्मी यानी कलीग ही तो है। पीएम मोदी की यह बात सुनते ही सुहास एलवाई ने हाथ जोड़ लिए। पीएम मोदी ने कहा कि आपके अंदर जो शारीरिक कमी थी, आपने उसे अपनी शक्ति में परिवर्तित कर लिया। ये आपका अपना पराक्रम है आपका आत्मविश्वास है। आपने आज जो करके दिखाया है, इसके लिए आपको मेरी ओर से बहुत बहुत बधाई है। अब उत्तर प्रदेश आपका इंतजार कर रहा है। 

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