नोएडा: किताब खोलेगी आरुषि की हत्या का राज़

संक्षेप:

  • मर्डर मिस्ट्री केस पर लिखी गई किताब
  • 2008 में हुआ था 14 साल की आरुषि तलवार का मर्डर
  • नोएडा के सेक्टर 25 (जलवायु विहार) में हुआ था मर्डर

कैसे भूल सकते है 15-16 मई 2008 के उस दिन को जो आरुषि हेमराज हत्याकाण्ड के नाम पर पड़ा है। इस केस को पूरे 9 साल हो गए है लेकिन लोगों के जहन में इस केस को लेकर लाखों सवाल है। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर दो कत्लों की वारदात दुनिया की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री कैसे बन गई।

नोएडा- कैसे भूल सकते है 15-16 मई 2008 के उस दिन को जो आरुषि हेमराज हत्याकाण्ड के नाम पर पड़ा है। इस केस को पूरे 9 साल हो गए है लेकिन लोगों के जहन में इस केस को लेकर लाखों सवाल है। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर दो कत्लों की वारदात दुनिया की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री कैसे बन गई। कई सवाल सामने आए- कौन है आरुषि का कातिल, कैसे हुई आरुषि की हत्या, किसने हेमराज को मारा, कौन हेमराज की लाश राजेश तलवार के घर की छत पर ले गया और सबसे बड़ा सवाल कि आरुषि-हेमराज के कत्ल का मकसद क्या था?

इस मिस्ट्री केस पर किताब, डॉक्यूमेंट्री से लेकर फिल्म तक बन चुकी है। इस मिस्ट्री के सस्पेंस की कुछ गुत्थिओं को सुलझने का प्रयास ‘कातिल जिंदा है, एक थी आरुषि’ के नाम पर बूक बनी। जिसे लेखक सुनील मौर्य ने लिखा। इस बूक जरिए ये बताने की कोशिश की गई है कि आखिर उस रात क्या हुआ था। जो सवाल उठ रहे है शयद उसका जवाब इस किताब में लोगों को मिस सके।

बता दें कि इस कत्ल की गुत्थी में नोएडा पुलिस से लेकर देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई ने जांच की थी। जिसके बाद एक के बाद एक इन्वेस्टिगेशन हुए लेकिन इस क्लाइमेक्स फिर भी बरकरार है।

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