105 मिनट में 4km पैदल चल पीएम मोदी ने पूरी की अटल जी की अंतिम यात्रा

संक्षेप:

  • पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन
  • स्मृति स्थल लाया गया अटल बिहारी वाजपेयी का पार्थिव शरीर
  • वाजपेयी की शव यात्रा में पीएम मोदी और अमित शाह पैदल चले

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर बीजेपी मुख्यालय से स्मृति स्थल की ओर ले जाया जा रहा है। शाम चार बजे राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनका पार्थिव शरीर आईटीओ, दिल्ली गेट, शांति वन चौक होते हुए स्मृति स्थल लाया गया है। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की शव यात्रा में पीएम मोदी और अमित शाह ने 105 मिनट चलकर 4 किमी का लंबा सफर पैदल चलकर तय किया और अंतिम यात्रा को पूरा किया।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा में हजारों लोगों की भीड़ शामिल है। पार्थिव शरीर के वाहन के पीछे-पीछे पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पैदल चलते हुए नजर आए। आपको बता दें कि एम्स ने गुरूवार शाम को बयान जारी कर बताया कि `पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 अगस्त 2018 को शाम 05.05 बजे अंतिम सांस ली। पिछले 36 घंटों में उनकी तबीयत काफी खराब हो गई थी। हमने पूरी कोशिश की पर आज उन्हें बचाया नहीं जा सका।` वाजपेयी को यूरिन इन्फेक्शन और किडनी संबंधी परेशानी के चलते 11 जून को एम्स में भर्ती कराया गया था। मधुमेह के शिकार वाजपेयी का एक ही गुर्दा काम कर रहा था।

तीन बार बने प्रधानमंत्री

ये भी पढ़े : सलमान खुर्शीद बोले- चुनाव जीतना तो दूर, कांग्रेस अपना भविष्य तक नहीं कर सकती तय


बीजेपी के संस्थापकों में शामिल वाजपेयी 1996 से 1999 के बीच तीन बार पीएम चुने गए। वह पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने और उनकी सरकार सिर्फ 13 दिनों तक ही रह पाई। 1998 में वह दूसरी बार प्रधानमंत्री बने, तब उनकी सरकार 13 महीने तक चली। 1999 में वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और 5 वर्षों का कार्यकाल पूरा किया। 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले वह पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री थे।

2005 में लिया राजनीति से संन्यास

कभी अपनी कविताओं और भाषणों से लोगों को मंत्रमुग्ध करने वाले वाजपेयी स्वास्थ्य खराब होने के कारण सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे। 2005 में उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था और तब से वह अपने घर पर ही थे। अटल बिहारी वाजपेयी को कई वर्षों से बोलने और लिखने में भी तकलीफ होती थी। वह किसी को पहचान भी नहीं पा रहे थे।

 

If You Like This Story, Support NYOOOZ

NYOOOZ SUPPORTER

NYOOOZ FRIEND

Your support to NYOOOZ will help us to continue create and publish news for and from smaller cities, which also need equal voice as much as citizens living in bigger cities have through mainstream media organizations.

Read more Noida News In Hindi here. देशभर की सारी ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के लिए
NYOOOZ HINDI को सब्सक्राइब करें |

Related Articles