स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से PM मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें, यहां पढ़िए

संक्षेप:

  • पीएम नरेंद्र मोदी 73वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से तिरंगा फहराने के बाद देशवासियों को आजादी दिवस और रक्षाबंधन की बधाई दी, 
  • नई सरकार ने 10 सप्ताह भी पूरे नहीं किए हैं, लेकिन इस छोटे समय में सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं. 
  • किसान भाइयों-बहनों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि के तहत 90 हजार करोड़ रुपया किसानों के खाते में ट्रांसफर करने का काम आगे बढ़ा है. 

नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी 73वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से तिरंगा फहराने के बाद देशवासियों को आजादी दिवस और रक्षाबंधन की बधाई दी। पीएम ने बाढ़ पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की और राहत कार्यों में लगे कर्मियों का धन्यवाद व्यक्त किया। आइए आपको बताते हैं पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें...

10 सप्ताह में बड़े फैसले

नई सरकार ने 10 सप्ताह भी पूरे नहीं किए हैं, लेकिन इस छोटे समय में सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। 10 सप्ताह के भीतर हमारी मुस्लिम माताओं बहनों को उनका अधिकार दिलाने के लिए कानून बनाना। आतंक से जुड़े कानूनों मे आमूलचूल परिवर्तन करके उसको नई ताकत देने का, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत करने का काम किया गया।

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किसानों और व्यापारियों की मदद

किसान भाइयों-बहनों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि के तहत 90 हजार करोड़ रुपया किसानों के खाते में ट्रांसफर करने का काम आगे बढ़ा है। हमारे किसान और छोटे व्यापारी भाई बहन कभी कल्पना नहीं कर सकते थे के उनके जीवन में पेंशन की व्यवस्था हो सकती है। हमने पेंशन योजना को लागू किया है।

अब सपनों को पूरा करने का समय

2014 से 19 पांच साल आपने मुझे सेवा का मौका दिया। अनेक चीजें ऐसी थी कि आम लोग निजी आकांक्षाओं के लिए जूझ रहे थे। हमने तय किया कि लोगों की रोजमर्रा की जरूरत है उनपर हमने बल दिया और गाड़ी ट्रैक पर लाए। वक्त बदलता है, यदि 2014-19 आवश्यकताओं की पूर्ति का समय था तो अब उनके सपनों को साकार करने का कालखंड है। हमने पांच साल का खाका तैयार किया है और एक के बाद एक कदम उठा रहे हैं।

निराशा आशा में बदली

तब हर किसी के चहेरे पर निरासा थी, लोग सोचते थे कि क्या सरकार बदलने से देश बदल सकता है। जब 2019 में 5 साल के कठिन परिश्रम और समर्पण और देश और देशवासियों के लिए पल-पल खपाते रहे, मैं लोगों के बीच गया तो निराशा आशा में बदल चुकी थी। लोगों का एक ही स्वर था, हां मेरा देश बदल सकता है। हम भी देश बदल सकते हैं। 130 करोड़ नागरिकों की चेहरों की यह भाव हमें नई ताकत नया विश्वास देती थी।

तीन तलाकखत्म, मुस्लिम बेटियों को समान अधिकार

हमारी मुस्लिम बेटियों के सिर पर 3 तलाक की तलवार लटकी हुई थी। वे डरी हुई जिंदगी जीती थी। वे कभी भी 3 तलाक का शिकार हो सकती हैं, यह भय उनको जीने नहीं देता था। दुनिया के कई इस्लामिक देशों ने इस कुप्रथा को हमसे बहुत पहले खत्म कर दिया, लेकिन किसी ना किसी कारण से हम मुस्लिम माताओं-बहनों को हक देने से हम हिचकिचाते थे। अगर हम बाल विवाह, सती प्रथा को खत्म कर सकते हैं दहेज प्रथा के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं तो क्या न हम 3 तलाक के खिलाफ भी आवाज उठाएं। इसलिए भारतीय संविधान की भावना का आदर करते हुए मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार मिले, हमने इस महत्वपूर्ण फैसले को लिया। यह निर्णय राजीतिक तराजू से तौलने का निर्णय नहीं होते हैं।

अनुच्छेद 370 को खत्म किया

हम समस्याओं को टालते नहीं है और ना ही समस्याओं को पालते हैं। हम समस्याओं टालने और पालने का वक्त नहीं है। जो काम 70 साल में नहीं हुआ। वह 70 दिन के भीतर हुआ। अनुच्छेद 370, 35A को हटाने का काम लोकसभा और राज्यसभा ने दो तिहाई बहुमत से खत्म कर दिया। इसका मतलब है कि हर किसी के दिल में यह बात थी, लेकिन आगे कौन आए इसका इतंजार था। देशवासियों ने मुझे ये काम दिया। मैं वही करने आया हूं, जो आप चाहते हैं। हमने राज्य का पुनर्गठन भी किया। हर सरकार ने काम किया, लेकिन इच्छित परिणाम नहीं मिले हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को आशा-आकांक्षा पूरी हो यह हमसब की जिममेदारी है। 130 करोड़ लोगों को यह जिम्मेदारी उठानी है।  30 साल में इन व्यवस्थाओं ने अलगाववाद को बल दिया है। आतंकवाद को जन्म दिया है। परिवारवाद को पोसा है और भ्रष्टाचार और भेदभाव की नीति को जन्म दिया। वहां की महिलाओं, दलितों, जनजातिय समहू, गुर्जर-बक्करवाल, गद्दी, सिपी को अधिकार मिलने चाहिए, उन्हें देने की दिशा में...वहां के हमारे सफाई कर्मचारी भाई बहनों के साथ कानूनी रोक लगा दी गई थी। उनके सपनों को कुचल दिया गया था। आज हमने उन्हें यह आजादी दी है। भारत विभाजन हुआ। लाखों लोग विस्थापित हुए। जो लोग जम्मू-कश्मीर में बसे उन्हें कानूनी और मानवीय अधिकार नहीं मिले। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत की सुख शांति और प्रगति में बहुत योगदान दे सकता है। उसके पुराने महान दिवसों को लौटाने का हम प्रयास करें। उन प्रयासों के लिए यह नई व्यवस्था बनी है, सीधे नागरिकों के लिए सुविधा पैदा करेगी। जब जम्मू-कश्मीर का नागरिक सीधे दिल्ली सरकार से सवाल पूछ सकता है। बीच में कोई रुकावट नहीं आएगी।  आपका इरादा ना था  जो लोग 370 की वकालत कर रहे हैं उनसे देश पूछ रहा है कि यदि यह अनुच्छेद इतना महत्वपूर्ण था उसी से भाग्य बदलने वाला था तो आप लोगों ने अब तक उसे स्थायी को नहीं बनाया, अस्थायी क्यों रहने दिया। इसका मतलब यह है कि आप भी जानते थे कि जो हुआ है वह सही नहीं हुआ है, लेकिन सुधार करने की आपमें हिम्मत नहीं थी, इरादा नहीं था। मेरे लिए देश का भविष्य ही सबकुछ है। राजनीतिक भविष्य कुछ नहीं होता है। हमारे संविधाननिर्माताओं ने, सरदार वल्लभ भाई पटेल ने देश की एकता के लिए कठिन फैसले लिए। लेकिन अनुच्छेद 370 और 35A की वजह से रुकावटें भी आईं।

वन नेशन-वन इलेक्शन

आज पूरा देश कह सकता है- एक नेशन-एक कॉन्स्टीट्यूशन। जीएसटी के माध्यम से वन नेशन वन टैक्स के सपने को पूरा किया। पिछले दिनों वन नेशन-वन ग्रिड को सफलतापूर्वक किया। वन नेशन वन मोबिलिटी कार्ड की व्यवस्था की। आज देश में व्यापक रूप से चर्चा है, वन नेशन वन इलेक्शन।

जल जीवन मिशन की घोषणा

आज मैं लाल किले से घोषणा करता हूं कि हम आने वाले दिनों में जल जीवन मिशन को लेकर आगे बढ़ेंगे। इसके लिए केंद्र और राज्य साथ मिलकर काम करेंगे और इसके लिए साढ़े 3 लाख रुपये से ज्यादा रकम खर्च करने का संकल्प है। जल संचय, जल सिंचन हो वर्षा के बूंद-बूंद पानी बचाने का काम हो, समुद्री पानी और वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट हो, माइक्रो इरिगेशन हो, पानी बचाने का काम हो,पानी का महत्व को समझें, हम लगातार प्रयास करें और इस विश्वास के साथ बढ़ें कि पानी के क्षेत्र में जितना काम हुआ है, अगले 5 साल में चार गुना तेजी से बढ़ना है। हम और इंतजार नहीं कर सकते हैं।

जनसंख्या विस्फोट

अब हमारा देश उस दौर में पहुंचा है, जिसमें चुनौतियों को सामने से स्वीकार करना है। कभी राजनीतिक नफा-नुकसान के इरादे से हम निर्णय करते हैं। इससे देश का बहुत नुकसान होता है। हमारे यहां बेतहासा जनसंख्या विस्फोट हो रहा है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए अनेक संकट पैदा करता है। हमारे देश में एक जागरूक वर्ग है जो इस बात को भली-भांति समझता है वह अपने घर में शिशु को जन्म देने से पहले सोचता है कि मैं उसकी जरूरतों को पूरा कर पाऊंगा कि नहीं। आज भी स्वंय प्रेरणा से एक छोटा वर्ग परिवार को सीमित रखकर अपना भी भला करता है और देश की भलाई में भी बड़ा योगदान देता है। छोटा परिवार रखकर भी वे देशभक्ति करते हैं। मैं चाहूंगा कि समाज के सभी लोग इन्हें देखें। देखते ही देखते परिवार कैसे आगे बढ़े। हम भी उनसे सीखें। हमारे घर में किसी भी शिशु को आने से पहले हम सोचें कि जो शिशु हमारे घर में आएगा क्या उसकी जरूरतों के लिए हमने खुद को तैयार कर लिया है? क्या मैं उसे समाज के भरोसे छोड़ दूंगा। एक समाजिक जागरूकता की आवश्यकता है। समाज के बाकी वर्गों को जोड़कर हमें जनसंख्या विस्फोट की चिंता करनी होगी। राज्यों और केंद्र सरकार को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इस काम को करना होगा।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई

भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद हमारे देश को कल्पना से अधिक नुकसान किया है। दीमक की तरह हमारे जीवन में घुस गया है, इसको निकालने के लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं, सफलताएं भी मिली हैं, लेकिन बीमारी इतनी गहरी है कि हमें और अधिक प्रयास करना होगा, सरकारी स्तर पर ही नहीं हर स्तर पर करना होगा। यह एक ऐसी बीमारी है, जिससे लगातार लड़ना होगा। पिछले 5 साल में, इस साल आते ही सरकार में बैठे बडे़-बड़े लोगों की छुट्टी कर दी गई, जो इसमें रुकावट बनते थे।

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